01.01.2018 ►Acharya Mahashraman Ahimsa Yatra

Published: 01.01.2018

🌸 श्रीमुख से उच्चरित बृहत मंगलपाठ से हुआ नूतन वर्षाभिनन्दन 🌸

  • सुदूर गांव बालीजोड़ी में महातपस्वी के सन्निधि में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
  • लगभग 7 किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री पधारे बालीजोड़ी एमई विद्यालय
  • कई कार्यक्रमों के साक्षी बन श्रद्धालु हुए निहाल
  • आचार्यश्री ने अहिंसा, संयम तप द्वारा जीवन को मंगलमय बनाने की दी पावन प्रेरणा


01.01.2018 बालीजोड़ी, क्योंझर (ओड़िशा)ः

एक जनवरी 2018 का सूर्य मानों ओड़िशा की धरती पर एक स्वर्णिम बिहान लेकर आया। क्योंकि इसी ओड़िशा की धरती पर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना व अहिंसा यात्रा के साथ यात्रायित हैं। जब ऐसे महापुरुष जिस धरती पर गतिमान हों और मौका हो नूतन वर्ष 2018 के अभिनन्दन का तो भला कौन ऐसे स्वर्णिम पल को गुजर जाने देगा। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में ओड़िशा के क्योंझर जिले के बालीजोड़ी एमई विद्यालय के इस सुदूर इलाके में श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति तो शायद कुछ ऐसा ही बयां कर रही थी। मानों इस सुअवसर को संपूर्ण लाभ उठाने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं एक सैलाब आ गया था अपने आराध्य के चरणों की वंदना करने।

सोमवार को सूर्योदय के पूर्व ही ओड़िशा राज्य के ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों व क्षेत्रों से लोग आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में नववर्ष का बृहत मंगलपाठ का श्रवण करने को उपस्थित हो गए थे। हालांकि आचार्यश्री का बृहत मंगलपाठ का कार्यक्रम बालीजोड़ी एम.ई. स्कूल में ग्यारह बजे से होना था, किन्तु गुरु सन्निधि में पहुंचने के उतावलेपन में सूर्योदय से पूर्व ही पहुंच गए। हालांकि सूर्योदय के आसपास होने वाला अर्हतवन्दना के कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके उपरान्त निर्धारित समयानुसार आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ घटगांव स्थित तरनी ठकुरानी महाविद्यालय प्रांगण से नूतन वर्ष 2018 का पहला चरणन्यास किया तो मानों यह उत्कल धरा और इसके वासी ऐस सुअवसर प्राप्त कर आह्लादित हो उठे। लगभग सात किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री बालीजोड़ी स्थित बालीजोड़ी एमई स्कूल में पधारे।

श्रद्धालुओं की विराट उपस्थिति में बना बड़ा पंडाल भी आज छोटा महसूस हो रहा था। पूरा खुला मैदान चारों ओर से श्रद्धालुओं से पटा हुआ था। लगभग दस बजे आचार्यश्री कार्यक्रम स्थल में मंचासीन हुए तो आज चतुर्दशी तिथि होने के कारण समस्त साधु-साध्वियों की उपस्थिति भी सुन्दर दृश्य उत्पन्न कर रही थी। सर्वप्रथम तेरापंथ धर्मसंघ की दो साध्वियों साध्वीश्री प्रकाशवतीजी और साध्वी श्री भाग्यवतीजी के प्रयाण के संदर्भ में स्मृति सभा का आयोजन हुआ। इसमें आचार्यश्री ने दोनों साध्वियों के जीवनवृत्त की संक्षिप्त जानकारी दी और दोनों साध्वियों के आत्माओं के निरंतर आगे बढ़ते रहने की मंगलभावना व्यक्त की तथा चतुर्विध धर्मसंघ के साथ चार लोगस्स का ध्यान किया। इसके उपरान्त आचार्यश्री ने चतुर्दशी तिथि होने के कारण हाजरी पत्र का वाचन किया तो उपस्थित समस्त चारित्रात्माओं ने लेखपत्र उच्चरित किया।

जैसे ही घड़ी ने ग्यारह बजाए आचार्यश्री ने श्रीमुख से नूतन वर्ष 2018 के संदर्भ में बृहत मंगलपाठ के शुभारम्भ की घोषणा करते हुए ‘प्रभो तुम्हारे पावन पथ पर’ गीत का संगान किया। लगभग 11.11 बजे आचार्यश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं व बेंगलुरु गत दिनों आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में उपस्थित ज्ञानार्थियों को सम्यक्त्व दीक्षा प्रदान की।

उसके उपरान्त जब आचार्यश्री ने पूरे शरीर को स्थिर कर नववर्ष के मंगलपाठ का उच्चारण आरम्भ किया तो उपस्थित विशाल जनमेदिनी खड़े होकर मंगलपाठ का श्रवण करने लगी। मानों वे इसी सुअवसर का लाभ लेने के लिए तो यहां उपस्थित थे। ओड़िशा की धरा पर एक बहुत सुन्दर दृश्य उपस्थित हो गया। मंगलपाठ उच्चारण के पश्चात आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि इस वर्ष के लिए कोई भी एक अच्छा संकल्प स्वीकार किया जा सकता है। सुझाव के तौर पर आचार्यश्री ने आज से लेकर 31 दिसम्बर 2018 तक के लिए दस मिनट का समय स्वाध्याय में लगाने की पावन प्रेरणा प्रदान की और श्रद्धालुओं को उनके लिए संकल्पों के त्याग ग्रहण करवाया।

मंगलपाठ व संकल्प की प्रेरणा के पश्चात तेरापंथ धर्मसंघ की असाधारण साध्वीप्रमुखाजी ने वर्ष 2018 के अपने प्रथम संबोधन में श्रद्धालुओं को जीवन में कुछ नया करने के लिए उत्प्रेरित किया और सफलता प्राप्ति के लिए धैर्य धारण करने की सीख प्रदान की। इस अवसर पर स्वरचित कविता का पाठ भी महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी ने किया।

इसके उपरान्त तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने वर्ष 2018 के अपने प्रथम मंगल प्रवच में उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के मन में मंगल की कामना होती है। आदमी स्वयं के लिए भी मंगल की कामना करता है और समय-समय पर दूसरों को भी मंगल शुभकामना देता है। भौतिक मंगल में आध्यात्मिक मंगल जुड़ा हुआ है। मानों भौतिक मंगल की पृष्ठभूमि में आध्यात्मिक मंगल ही कार्य करता है। आध्यात्मिक मंगलों में उत्कृष्ट मंगल धर्म को कहा गया है। इस धर्म रूपी मंगल के तीन आयाम बताए गए हैं-अहिंसा, संयम और तप। आदमी के भीतर करुणा की भावना होनी चाहिए। अहिंसा को परम धर्म कहा गया है। आदमी को अपने जीवन में संयम रखने का प्रयास करना चाहिए। संयम एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो आत्मा को पापों से बचाता है। इसलिए आदमी को संयम की साधना करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को मन, वाणी और इन्द्रियों का संयम करने का प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री ने लोगों को अपने जीवन में तपबल की साधना को भी पुष्ट करने की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि स्वाध्याय, तप, ध्यान के द्वारा आपनी के जीवन में तप की प्रबलता हो तो जीवन मंगलमय हो सकता है। आचार्यश्री ने लोगों को वर्ष 2018 को सुफल बनाने की भी पावन प्रेरणा दी। वहीं बेंगलुरु के उपस्थित ज्ञानार्थियों को पावन प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री ने इस दौरान प्रसंगवश ‘यह है जगने की बेला’ गीत का भी संगान किया।

आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती और प्रेक्षा इंटरनेशल की ओर श्री अमरचंद लुंकड़, श्री विोद लूणिया व श्री पुखराज बड़ोला, श्री मूलचंद नाहर द्वारा नववर्ष का कैलेंडर लोकार्पित किया गया। अखिल भारती महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती कुमुद कच्छारा व महामंत्री श्रीमती नीलम सेठिया द्वारा भी मोबाइल एप आदि भी आचार्यश्री के चरणों में लोकार्पित किया गया।

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New rain water harvesting from Mr. Mahmud from Mahantangalam

  • Sudur village, Baljodi in the heart of the great pilgrims
  • Aacharyaree Padhare Baaljodi ME School, about 7 km away
  • Many of the programs have become revered Nihal
  • Acharyashree gave the holy inspiration to make life happy by nonviolence, patience

01.01.2018 Baljodi, Keonjhar (Odisha):

The Sun of January 2018 brought a golden morning on Odisha's land. Because, on this land of Odisha, Jain Swethambar is the luminous mahasurea of ​​the Tharpanth Dharma Sangh, the leader of Ahimsa Yatra, peacemaker Acharyashri Mahasramanji traveled with his Dhaval army and Ahimsa Yatra. When such great men are moving on the earth and the opportunity is to be celebrated in the new year 2018, who will allow such a golden moment to pass? In the remote area of ​​Baljodari MA School of Keonjhar district in Odisha, Mangal Sannidhi of Mahatpu Acharyashree Mahishmani was probably saying something like this in the vast presence of devotees. To get the full benefit of this opportunity, devotees from India and abroad had come to a salute to worship the feet of their adoration.

On Monday, before the sunrise, people from various states and regions of the country, not only from Odisha state, were present to listen to the grand mangala of New Year at the Manchal Sannidhi of Acharyashri. Although the program of the great mangalab of Acharyashri, Baljodari M.E. The school had to be from eleven o'clock, but in the hurry to reach Guru Sananidhi, he reached the sunrise. However, pilgrims participated in the program of Arhatvandana which took place around Sunrise. After this, Acharyasree accompanied his Dhaval army at the first phase of the new year 2018 from Tarni Thakurani College premises at Ghatgaon, then it was excited to get excellence and its inhabitants received this opportunity. Aacharyashree flown in Baljodi ME School, located around 7 km in Baljodiya.

The big Pandal, which was made in the presence of devotees, was feeling small even today. The whole open ground was leased from the devotees from all sides. Approximately ten o'clock, the Acharyashree program was held in the place of Monsense, due to the date of Chaturdashi today, the presence of all Sadhus and Sadhis was also creating beautiful scenes. First of all, a Sammelan Sabha was held in connection with the journey of Sadhvi Shree Vidyavati and Sadhvi Shri Bhagyavatiji, two Sadhvi of Teerapanth Dharma Sangh. In this, Acharyasri briefly summed up the lifecycle of both the Sadhvis and expressed the goodwill of the continuous progress of the souls of both Sadhvas and meditated four logs with the Fourth Congregation. After this, the Acharyashri read the Hajr pilgrimage due to the date of Chaturdashi, then all the charitas present in the letter made the paper very high.

As soon as the clock declared eleven instead of eleven shirts, Shrimukh had announced the song 'Prabhu on your holy path' while announcing the launch of the great mangalpath in the context of the new year 2018. At approximately 11.11 am, Acharyasri presented samyakta initiation to the attendees present in the mangal sannidhi of Acharyashree in the presence of devotees present and present in Bengaluru.

After that, when Acharyashree started to pronounce the new year's Mangalpath by stabilizing the whole body, the huge masses of the people stood and started listening to the Mangalpath. Suppose he was here to take advantage of this same opportunity. A very beautiful scene appeared on Odisha's side. After declaration of Mangalpath, Acharyashree gave holy inspiration to the devotees saying that any good resolution can be accepted for this year. As a suggestion, Acharyashree gave inspiration to apply ten minutes time in Swadhyayan from today to 31 December 2018 and accepted the sacrifice of devotees for their resolutions.
After the inspiration of Mangalpalith and Sankalp, the extraordinary Sadhvi Pramukhjee of Terapanth Dharmasanghi in his first address in the year 2018 catapulted devotees to something new in life and provided the learning to be patient for achieving success. On this occasion, the text of the autobiographical poem was also done by Mahashmani Sadhvi Pramukhhaji.

After this, Ekadashmastashasta Acharyashree Mahasramanji of Ekadashmadhashastra of the Tharapanth Dharma Sangha, while offering his holy pilgrimage to the devotees present in his first mangal discourse of 2018 said that in the mind of man there is a wish for Mangal. Man also wishes for Mangal for self and also gives good wishes to others from time to time. Spiritual Mars is connected in physical Mars. It is believed that the spiritual Mars works only in the background of the physical Mars. The great Mangal Dharma has been said in the spiritual mangers. This religion has been described as three dimensions of Mars - non-violence, restraint and tenacity. There must be a feeling of compassion within man. Nonviolence has been called the ultimate religion. Man should strive to maintain restraint in his life. Restraint is a protective shield that protects the soul from sins. Therefore, one should try to cultivate restraint. The man should try to restrain the mind, speech and the senses, and try to restrain the senses.

Acharyashree encouraged people to reinforce the sadhana of asceticism in their lives, saying that through Swadhyaya, asceticism, meditation, in the life of your Lord, the power of tenacity can lead to happiness. Acharyashree also gave inspiration to people to make the year 2018 successful. At the same time, Bangalore's present knowledge seekers provided inspiration. Acharyashree also composed the song 'This is Jagan Ki Bela'.

A calendar of New Year was inaugurated by Shri Amard Chand, Sri Vodh Lyunya and Shri Pukhraj Barola, Mr. Mulchand Nahar towards Jain Vishva Bharati and Abha International in Acharyashree's Mangal Sananidhi. Mobile app etc. was also inaugurated at the feet of Acharyashree by Mrs Kumud Kachhar, President of Akhil Bharati Mahila Mandal and also by Smt. Neelam Sethia, Smt. Neelam Sethia.

Sources

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