28.09.2015 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Posted: 28.09.2015
Updated on: 05.01.2017

Update

उत्तम ब्रम्हचर्य है! क्षमासागर जी महाराज की लिखी हुई एक कविता ✿

अभी तुमने
आग के रंग के कपडे पहने है.
अभी तुम्हारी कामवासना
योग की आग में
जली नहीं है,
अभी तुम्हे
स्त्री और पुरुष में
फर्क नज़र आता है.
स्त्री के पीछे भागना
और
स्त्री से दूर भागना,
यात्रा दोनों में जारी है.
अभी
सन्यास की यात्रा शुरू नहीं हुई!

यह कविता इस बात का सन्देश देती है की जब यात्रा, पीछे भागने की और दूर भागने की, के बिच में समयाभाव हो जाये तब ब्रह्मचर्य घटित होता है - मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज!

छोटी सी जिंदगी, मनमुटाव किसलिए
रहती हैं दिलों में, दिवार किसलिए
हैं साथ कुछ दिनों का, फिर सब अलग अलग
राहों में हम बिछाये, फिर काँटे किसलिए
हम बहुत ध्यान रखते हैं की, कोई भूल न फिर भी
जाने में अनजाने में, अपने वचन सुनानें में
हसने और हसाने में, रिश्तो के अपनाने में
सुख दुःख के आजाने में, कोई रस्म निभाने में
आपको पहुँचा हो कोई गम
…………….. तो?
|| क्षमा चाहते हैं हम ||

❖ नरेन्द्र मोदीजी ने केलिफोर्निया के फ़ेसबुक दफ़्तर में जो संदेश लिखा वो है 'अहिंसा परमो धर्म' । जैन धर्म के मूल सिद्धांत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का एक सार्थक प्रयास । क्योकि भारत देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अहिंसा परमो धर्मं के सिद्धांत को सबसे पहले लिखते है इसलिए मैं इसको कवर पेज बनाने और शेयर करने से रोक नहीं पाया... उनकी भावना सफल हो भारत फिर अहिंसा परमो धर्मं पालन करने वाले देश बने जहा अहिंसा हो!! ❖ Just Because Bharat Prime minister wrote 'Ahinsa Paramo Dharma' fundamental quotes of Jainism which means non-violence is supreme thing in this world.. feeling of not hurt anyone by thought, mind and physically, I couldn't stop myself posting it at this page. ❖

❖ PM Modi wrote this on the facebook wall @ FB HQ, USA ❖
Ahimsa Parmo Dharma ~ Satyamev Jayate ~ Vande Mataram ~ Narendra Modi

--- website: ♫ www.jinvaani.org Jainism' e-Storehouse ---

Update

❖ आज क्षमावाणी पर्व है... उत्तम क्षमा के दिन हम अपने दिल से सबको क्षमा करते है और आज के दिन सबसे क्षमा माँगते है!

✿ मुझे कुछ नहीं आता, मैंने गलतियों से सिखा है - आप मुझे क्षमा करे प्लीज! आज एक नयी शुरुआत करे और आने वाले दिनों और समय को क्षमा रूपी गंध से महकाए As An Admin I do ask for forgiveness humbly to everybody! ✿

दोस्तों, जैसे मैं जिनवाणी को मुनिओ के प्रवचन आदि को शेयर करता हूँ तो क्योकि एक समय में वस्तु के एक द्रष्टिकोण के बारे में बात की जा सकती है और जैसा आज बहुत सी बातो को लेकर मतभेद है तथा हमारी विचारधारा को अलग अलग रहती ही है क्योकि हर व्यक्ति अपनी समझ के अनुसार अर्थ को लेता है तो ऐसे में बहुत बार मैंने देखा है इन मतभेदों को लेकर कुछ व्यक्तियों के साथ ना चाहते हुए भी मनभेद हो जाता है जो कभी उजागर तो नहीं होता पर कोल्ड वॉर जैसा रहता है! मैं उन व्यक्तियों से आज क्षमा माँगना चाहता हूँ अगर मेरे कारण को कभी कषाय हुई हो, मेरे किसी शब्द से आपको गलत लगा हो या मेरे एडमिन होने के कारण कभी मेरे से कुछ गलती अनजाने या जान बुझकर करदी हो तो भी मुझे छोटा और अज्ञानी समझकर क्षमा करे, पेज बनाने और चलाने उदेश्ये सिर्फ और सिर्फ अपनी धर्मं वृद्धि और साथ धर्मं प्रभावना का था... है और रहेगा! कभी कभी ऐसी परिस्थितिया पेज में बन जाती है की मुझे एडमिन होने के कारण कुछ पोस्ट/कमेंट को डिलीट करना पड़ता है ताकि विवाद ज्यादा ना बढे इस वजह से कभी मेरे से भी गलती गलती हो जाना स्वाभाविक है तो मैं आपसे क्षमा चाहते हूँ, जिनके साथ कोई विवाद नहीं वे तो क्षमा करेंगे ही, पर यदि कभी किसी कोई भी बात के कारण कषाय हुई हो या उनके मन में कोई शल्य मेरे को लेकर हो तो कृपया क्षमा करे और अगर आप कुछ बताना चाहते है बता भी सकते है मैं अपने को सुधारने की कोशिश करूँगा -Nipun Jain [ Admin ]

--- website: ♫ www.jinvaani.org Jainism' e-Storehouse ---

News in Hindi

❖ सल्लेखना तैयारी के साथ मरण है-मरण की तैयारी नहीं। जो अपने मरण को सुधारने की सोचता है वही अपने जीवन को सुधारता है। - क्षु. ध्यान सागर जी महाराज

--- website: ♫ www.jinvaani.org Jainism' e-Storehouse ---

❖ ✿ यूँ ही हर वर्ष क्षमा पर्व पर मै सबसे क्षमा मांगता हूँ लगता है एक दिन मे ही एक वर्ष का भार टालता हूँ सोचता हूँ हो जायेगा सभी जीवों की विराधना का पाप क्षय लेकिन मै ही जानता हूँ, दे सकता था कितने जीवों को अभय जब स्वयं अपने ही जीव को मै, अभय नही दे पाया जब अपने ही सहज स्वभाव मे रहना मुझे नही आया तो क्या मै उन नन्हे नन्हे प्राणियों से क्षमा मांगूं जिन्हें मारता हूँ नित्य ही, जब सोवूं और जब जागूं कैसे कहूं पृथ्वी से,कि वो मुझको क्षमा करदे कैसे कहूँ मै इस जल से, कि वो मुझको क्षमा करदे कैसे कहूँ मै अग्नि से कि वो मुझको क्षमा कर दे कैसे कहूँ मै वायु से कि वो मुझको क्षमा करदे क्षमा कर दें वनस्पतियाँ, जिन्हें बेवजह उखाडा है क्षमा कर दें वो कीडे भी, जिन्हें कल धूप मे डाला है क्षमा कर दें वो कुत्ते भी, जिन्हें बेवजह डराया है क्षमा कर दें वो पशु पक्षी, जिनको दवाओं मे खाया है क्षमा कर दें सभी मानव, जिनका दिल रोज़ दुखाया है क्षमा कर दें सभी व्रतिजन, जो अनुचित लाभ उठाया है क्षमा कर दें सभी मुनिगण, विनय जिनकी न कर पाया क्षमा कर दें गुरु मेरे, जिनके कहने पे न चल पाया मैं बार गलती करके गुरुदेव के पास ही जाता हूँ गुरुदेव क्षमा की मूरत हैं मैं अनुचित लाभ उठाता हूँ गुरुवर ऐसा आशीष मिले, न दोष लगे व्रत चारित मे करुणा बरसाओ दयानिधि, मस्तक है आपके चरणों मे!

Ksamavani Forgiveness Day of forgiving and seeking forgiveness! On this auspicious occasion of Kshamavani (क्षमावाणी), we beg forgiveness for our intentional and unintentional wrongs, excesses, sins, that we might have done onto you. May we forgive every one. I'm apologetic for everything if I have impaired to all of you knowingly or unknowingly in any ways by my any kind of action, my postings, Articles or any decision which I made for maintain the sanctity of the page. Please exonerate me with your full affection. Michhami Dukkadam. _/_ Admin ~ Nipun Jain ÉUphorič

अपने मन में क्रोध को पैदा न होने देना और अगर हो भी जाए तो अपने विवेक से, नम्रता से उसे विफल कर देना। अपने भीतर आने वाले क्रोध के कारण को ढूँढकर, क्रोध से होने वाले अनर्थों के बारे में सोचना और अपने क्रोध को क्षमारूपी अमृत पिलाकर अपने आपको और दूसरों को भी क्षमा की नजरों से देखना। अपने से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए खुद को क्षमा करना और दूसरे के प्रति भी इसी भाव को रखना इस पर्व का महत्व है।

क्षमा पर्व मनाते समय अपने मन में छोटे-बड़े का भेदभाव न रखते हुए सभी से क्षमा माँगना इस पर्व का उद्देश्य है। हम सब यह क्यों भूल जाते हैं कि हम इंसान हैं और इंसानों से गलतियाँ हो जाना स्वाभाविक है। ये गलतियाँ या तो हमसे हमारी परिस्थितियाँ करवाती हैं या अज्ञानतावश हो जाती हैं। तो ऐसी गलतियों पर न हमें दूसरों को सजा देने का हक है, न स्वयं को। यदि आपको संतुष्टि के लिए कुछ देना है तो दीजिए ‘क्षमा’।

क्षमा करने से आप दोहरा लाभ लेते हैं। एक तो सामने वाले को आत्मग्लानि भाव से मुक्त करते हैं व दूसरा दिलों की दूरियों को दूर कर सहज वातावरण का निर्माण करके उसके दिल में फिर से अपने लिए एक अच्छी जगह बना लेते हैं।

तो आइए अभी भी देर नहीं हुई है। इस क्षमावणी पर्व से खुद को और औरों को भी रोशनी का नया संकल्प पाठ गढ़ते हुए क्षमा पर्व का असली आनंद उठाए और खुद भी जीए और दूसरों को भी जीने दे के संकल्प पर चलते हुए क्षमापर्व का लाभ उठाएँ। “उत्तम क्षमा, सबको क्षमा, सबसे क्षमा

--- website: ♫ www.jinvaani.org Jainism' e-Storehouse ---

Share this page on: