02.03.2016 ►Acharya Mahapragya ►An Amazing Experience of Karuna

Posted: 02.03.2016

02.03.2016

Original
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आचार्यश्री को तो इंग्लिश बोलनी आती नहीं!!!
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२ मार्च २०१३,
दुबई |
आज दुबई ज्ञानशाला में
करुणा जी (Carla Geerdes) और अपरिग्रह जी आये थे |
ये दोनों जर्मनी रहते है और जैन धर्म को follow करते है |
इन्होने अपने कई अनुभव हमारे साथ बांटे कि
इनको जैन धर्म के बारे में पता लगा,
कैसे अपनाया और
कैसे उसमे आगे बढे |
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एक अनुभव -
करुणा जी ने बताया कि
जब पहली बार गुरदेव महाप्रज्ञ जी के दर्शन किये
तो वो समणी जी को पढ़ा रहे थे |
गुरदेव ने फरमाया - " Do you accept me as your Guru"
करुणा जी ने कहा - "O yes! that is why I am here"
इसके बाद अपने आप इनके घुटने झुक गए और
माथा धरती पे लगा में वंदना की |
उस दिन से पहले इनको वंदना कैसे करते है,
ये भी नहीं पता था |
ये सब कुछ अपने आप हुआ |
इनको बहुत आनंद आया और
चेहरे पे प्रसन्नता छ गयी |
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एक समणी जी पूछा कि
आप इतनी खुश क्यों है,
तो आपने ऊपर वाला वार्तालाप बताया |
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समणी जी ने कहा कि
हमने तो कुछ सुना नहीं और
आचार्यश्री को तो इंग्लिश बोलनी नहीं आती है |
लेकिन आपने कहा कि आपका वार्तालाप हुआ है |
आश्चर्य!!!
किसी ने नहीं सुना,
किसी ने कुछ नहीं बोला और
गुरु और शिष्य का वार्तालाप हो गया|
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ऐसा क्यों हुआ?
क्या यह संभव है?
इसका समाधान
आचार्यश्री महाप्रज्ञजी की " चित्त और मन " में मिलता है |
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दिगम्बर मानते है - तीर्थंकर नहीं बोलते |
श्वेताम्बर मानते है - तीर्थंकर बोलते हैं |
दिगम्बर कहृते हे-तीर्थंकर बोलते नहीं,
केवल ध्वनि निकलती है|
इसमें मुझे वैज्ञानिकता लगती है ।
बहुत वैज्ञानिक बात है यह ।
वे बोलते नहीं;
किन्तु जो कहना चाहते है,
वह सब कुछ सब तक पहुंच जाता है ।
कोरी ध्वनि होती है, भाषा नहीं होती है |
किन्तु जितने लोग बैठे होते हैं,
वे उस ध्वनि को अपनी-अपनी भाषा के रूप में समझ लेते हैं ।
श्वेताम्बर मानते हें - तीर्थंकर बोलते हैं एक भाषा में |
हिन्दी जानने वाले उसे हिन्दी में समझ लेते हैं,
संस्कृत जानने वाले संस्कृत में और
प्राकृत जानने वाले प्राकृत में समझ लेते हैं |
हिन्दी जानने वाले समझते हैं कि वे हिंदी में बोल रहे हैं |
संस्कृत जानने वाले समझते हैं कि वे संस्कृत में वोल रहे हैं |
प्राकृत जानने वाले समझते हैं कि वे प्राकृत में बोल रहे हैं |
आदमी जानता हे कि वे आदमी की भाषा में बोल रहे हें और
पशु समझते है कि वे पशु की भाषा में बोल रहे हैं |
उनकी ध्वनि या वाणी को आदमी समझ जाता है,
पशु भी समझ जाता हे और
देवता भी समझ जाता है ।
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Translated
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Acharya Sri does not know to speak English.
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2nd March, 2016
Dubai
Aparigraha ji and Karuna ji came in Gyanshala, Dubai today. The couple lives in Germany and follows Jain Religion.
They shared many of their amazing experiences there about how they came to know about Jainism, how they adopted it and moved forward with this.
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One of the amazing experiences Karuna ji shared about their first visit for adoration in the feet of His Holiness Acharya Mahapragya. When they entered, Gurudev was teaching the Samanis.
Gurudev addressed to Karuna ji - "Do you accept me as your Guru."
Karuna ji replied - "O yes! that is why I am here."
After that she bent down on knees and her head touched the floor in Vandana manner.
Before this happened she never knew how to do Vandana.
Everything was happening by itself. She felt the great rejoice and the pleasure could be seen on her face.
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One Samani asked - Why are you so happy?
then Karuna ji told her the above conversation.
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Samani surprisingly said - But we did not even hear anything and Acharya Sri does not know to speak English.
But Karuna ji said again - Yes we had a conversation.
Miracle!!
Preceptor and Disciple had a conversation even if no one heard, nothing was spoken.
Why this happened?
Is it possible?
extrication of this can found in Acharya Mahapragya's 'Chitta aur Mann' (Soul and Psyche).
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Digambaras believe that Tirthankaras do not speak only chord flows out without any language. People are able to understand this in their own language.
whereas according to Shvetambaras Tirthankaras speak in one language only but people of different languages like Hindi, Sanskrit, Prakrit etc. feel like it is being preached in their own language and this happens not only with human beings but also with animals and deities.
Scientifically we can say they may not speak but whatever they want to say. reach to us all.

Acharya Mahapragya

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Source/Info

Chanchal Bothara

English translation by Kavita Bhansali