22.09.2016 ►Ahimsa Yatra ►News & Photos

Posted: 22.09.2016
Updated on: 10.01.2018

News in Hindi:

Gadal, Dharapur, Guwahati, Assam, India

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति
सारभूत ज्ञान ग्रहण करने का हो प्रयास: आचार्यश्री
-आचार्यश्री ने लोगों को ज्ञान प्राप्ति के लिए जागरूक रहने की दी प्रेरणा
-मुख्यमुनिश्री ने लोगों को दिखाया उन्नति का मार्ग


22.09.2016 गड़ल (असम)ः ज्ञान से व्यक्ति पदार्थों को जान लेता है। सभी प्राणी में ज्ञान होता है, लेकिन अवबोध के रूप में। सामान्य आदमी के पास मतिज्ञान और श्रुतज्ञान होता है। आदमी को अपना श्रुतज्ञान बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञानार्जन के प्रति आदमी को जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। श्रुतज्ञान की आराधना करने वाला व्यक्ति जिनेश्वर भगवान की आराधना कर सकता है और अपनी आत्मा का कल्याण कर सकता है। उक्त ज्ञान की बातें गुरुवार को अहिंसा यात्रा के प्रणेता, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने चतुर्मास प्रवास स्थल परिसर में बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को बताईं।

आचार्यश्री ने लोगों को ज्ञानार्जन के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि आदमी को कथा, प्रवचन के माध्यम से श्रुतज्ञान को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। श्रुतज्ञान बढ़ाकर आदमी अपना कल्याण कर सकता है। ज्ञान की आराधना जितनी अच्छी होगी, जीवन उतना अच्छा हो सकता है और इहलोक के साथ परलोक भी संवर सकता है। परमपूज्य आचार्य तुलसी लोगों को श्रुतज्ञान बढ़ाने के लिए कितना उत्प्रेरित करते थे। वे अध्यापन के माध्यम से लोगों को ज्ञान बढ़ाने की प्रेरणा प्रदान करते थे। श्रावक-श्राविकाओं को ज्ञानार्जन करने का प्रयास करना चाहिए। प्रातःकाल के प्रवचन को महत्त्वपूर्ण बताते हुए आचार्यप्रवर ने कहा कि आगमवाणी युक्त प्रवचन के श्रवण से ज्ञान का विकास हो सकता है। ज्ञान तो अनंत है लेकिन आदमी के पास समय कम है। इसलिए आदमी को सारभूत ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान को ग्राहक बनकर ग्रहण करने से ज्ञान में वृद्धि हो सकती है। इसलिए आदमी को ज्ञानार्जन के लिए हमेशा जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए और सारभूत ज्ञान ग्रहण कर अपने जीवन के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। आचार्यश्री ने लोगों को सूचना देते हुए कहा कि अब दिन में मैं लगभग एक बजे से लेकर ढाई बजे तक अनिश्चितकाल तक मौन रहूंगा और इस दौरान मंगलपाठ भी नहीं सुनाया जा सकेगा।

आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त मुख्यमुनिश्री ने लोगों को उत्प्रेरित करते हुए कहा कि जो जागते हैं, उनकी बुद्धि बढ़ती है और सोते हैं उनकी उनकी बुद्धि कुंठित हो सकती है। जो सोता है वह दुखी और जो जागते हैं वे सुखी हो सकते हैं। जगना उन्नति और सोना अवनति का रास्ता होता है। जो जगता है वह वह कुछ प्राप्त कर सकता है और जो सोता है उसे कुछ प्राप्त नहीं हो सकता। इसलिए आदमी को जागृत रहने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए मुख्यमुनिश्री ने एक कहानी के माध्यम से लोगों को अपनी चेतना को जागृत करने की प्रेरणा प्रदान की। कार्यक्रम के अंत मंे श्रीमती सरला दूगड़ ने घरेलू नुस्खे और धार्मिक गीतिका आचार्यश्री के चरणों में समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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