18.01.2017 ►TMC ►Terapanth Center News

Posted: 18.01.2017
Updated on: 19.01.2017

Update

🌏 आज की प्रेरणा 🌎
प्रवचनकार - आचार्य श्री महाश्रमण
प्रस्तुति - अमृतवाणी 📺
आलेखन - संस्कार चैनल के श्रवण से:-

आर्हत वाड्मय में कहा गया है - मनुष्य के शरीर में पांच इन्द्रिया होती है | कान से सुना जाता है, आँख से देखा जाता है, नाक से सुंघा जाता जा सकता है, जीभ से चखा जा सकता है और शरीर से स्पर्श किया जा सकता है| अनंत,-अनंत प्राणी ऐसे हैं जिन्हें पांचों इन्द्रियां प्राप्त नहीं हैं | इन पांचों इन्द्रियों को हम ज्ञान का माध्यम बनाएं| श्रोत व चक्षु दो कामी इंद्रियां हैं और बाकि घ्राण, रस व स्पर्श भोगी इन्द्रियां है | आदमी को इन्द्रयों का संयम करना चाहिए | साधु व श्रावक को तो संयम करना ही चाहिए शासक के लिए भी एक सीमा तक संयम ज- रूरी है वरना भोग विलासिता शासन के संचालन में भी वाधक हो सकती है | हाथ पैरों का अनावश्यक हिलाना डुलाना भी न करें | वाणी का भी संयम रखें व ऐसी भाषा का प्रयोग न करें जिससे दुसरे को कष्ट हो | बात में आक्रोश नहीं बल्कि मुस्कान हो | मुस्कान से थकान दूर होती है | कहाँ बोलना, कहाँ न बोलना! क्या बोलना, क्या न बोलना! इस बात का विवेक होना चाहिए | आवश्यक, मृदु व यथार्थ बोलें भोजन में भी हमारा संयम हो | पदार्थों का उपयोग तो हो सकता है पर उपभोग न हो यह काम्य है |

दिनांक - १८ जनवरी २०१७ बुधवार

📢 माथाभांगा: शांतिदूत का भव्य स्वागत 👏👏
परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी का आज माथाभांगा में पावन पदार्पण हुआ।
यहां आचार्य श्री का दो दिवसीय प्रवास है।
पावन सन्निधि से प्रवेश एवं स्वागत कार्यक्रम की मनोरम झलकियां।

18.01.2017
प्रस्तुति > #तेरापंथ मीडिया सेंटर
#jain #terapanth #Acharyamahashraman #AhimsaYatra #siliguri #Mathabhanga #coochbehar #westbengal #vihar #news

🌏 आज की प्रेरणा 🌎
प्रवचनकार - आचार्य श्री महाश्रमण
प्रस्तुति - अमृतवाणी 📺
आलेखन - संस्कार चैनल के श्रवण से:-

आर्हत वाड्मय में कहा गया है - मनुष्य के शरीर में पांच इन्द्रिया होती है | कान से सुना जाता है, आँख से देखा जाता है, नाक से सुंघा जाता जा सकता है, जीभ से चखा जा सकता है और शरीर से स्पर्श किया जा सकता है| अनंत,-अनंत प्राणी ऐसे हैं जिन्हें पांचों इन्द्रियां प्राप्त नहीं हैं | इन पांचों इन्द्रियों को हम ज्ञान का माध्यम बनाएं| श्रोत व चक्षु दो कामी इंद्रियां हैं और बाकि घ्राण, रस व स्पर्श भोगी इन्द्रियां है | आदमी को इन्द्रयों का संयम करना चाहिए | साधु व श्रावक को तो संयम करना ही चाहिए शासक के लिए भी एक सीमा तक संयम जरूरी है वरना भोग विलासिता शासन के संचालन में भी वाधक हो सकती है | हाथ पैरों का अनावश्यक हिलाना डुलाना भी न करें | वाणी का भी संयम रखें व ऐसी भाषा का प्रयोग न करें जिससे दुसरे को कष्ट हो | बात में आक्रोश नहीं बल्कि मुस्कान हो | मुस्कान से थकान दूर होती है | कहाँ बोलना, कहाँ न बोलना! क्या बोलना, क्या न बोलना! इस बात का विवेक होना चाहिए | आवश्यक, मृदु व यथार्थ बोलें भोजन में भी हमारा संयम हो | पदार्थों का उपयोग तो हो सकता है पर उपभोग न हो यह काम्य है |
#jain #terapanth #AcharyaMahashraman #tmc
दिनांक - १८ जनवरी २०१७ बुधवार

News in Hindi

🔯 गुरुवचनों को अपनाये - जीवन सफल बनायें 🔯
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🙏 जय जिनेन्द्र सा 🙏

दिनांक- 18-01-2017
तिथि: - माघ बदी छठ(६)
बुधवार का *त्याग/पचखाण*

1-आज भिन्डी की सब्जी खाने का त्याग करें।

जय जिनेन्द्र
प्रतिदिन जो त्याग करवाया जाता हैं सभी से निवेदन है की आप स्वेच्छा से त्याग आवश्य करे। छोटे छोटे त्याग करके भी हम मोक्ष मार्ग की आराधना कर सकते हैं। त्याग अपने आप में आध्यात्म का मार्ग हैं।
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🙏तेरापंथ मीडिया सेंटर🙏

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