08.02.2017 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Posted: 08.02.2017

Update

आचार्य श्री वर्धमानसागर जी सासंघ आहारचर्या.. #LifeStory #OsamScene #AcharyaVardhmanSagar

आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज का गृहस्थ अवस्था का नाम यशवंत कुमार था. श्री यशवंत कुमार का जन्म मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के सनावद ग्राम में हुआ.श्रीमती मनोरमा देवी एवं पिता श्री कमल चाँद पंचोलिया के जीवन में इस पुत्र रत्न का आगमन भादों सुदी ७ संवत २००६ दिनांक १८ सितम्बर सन १९५० को हुआ. आपने बी.ए. तक लौकिक शिक्षा ग्रहण की, सांसारिक कार्यों में आपका मन नहीं लगता था. संयोगवश परम पूज्य ज्ञानमती माताजी का सनावद में चातुर्मास हुआ जिसमे आपने अपने वैराग्य सम्बन्धी विचारों को और अधिक दृड़तर बनाया. आपने आचार्य श्री विमल सागर ji महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया है, १८ वर्ष की अवस्था में आचार्य श्री धर्म सागर ji महाराज से आपने मुनि दीक्षा ग्रहण की, यह दिन फाल्गुन सुदी ८ संवत २५२५ के रूप में विख्यात हुआ है, जब श्री शांतिवीर नगर, श्री महावीर जी में मुनि दीक्षा लेकर आपको मुनि श्री वर्धमान सागर नाम मिला. चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की परम्परा के पंचम पट्टादीश होने का आपको गौरव प्राप्त है, इस पंचम काल में कठोर तपश्चर्या धारी मुनि परम्परा को पुनः aajस्थापित करने का जिन आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज को गौरव हासिल हुआ है, उसी परम्परा के पंचम पट्टादीश के रूप निर्दोष चर्या का पालन करते हुए पूरे देश में धर्म की गंगा बहाने का पुण्य मिलना निश्चित इस जन्म के अलावा पूर्व जन्म की साधनाओ का ही सुफल है. वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जब बहुत अल्प संख्या में मुनि संघ या मुनिगण रह गए हैं जिनके बारे में कहीं कोई टीका टिप्पणी नहीं होती हो, उनमें सबसे ऊपर शिखर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर jजी का नाम लिया जाता है, जिनके बारे में कहीं भी विपरीतता के रूप में कोई मामूली टीका टिप्पणी तक नहीं हो रही हो, आचार्य श्री वर्धमान सागर jjiजी अत्यंत सरल स्वभावी होकर महान क्षमा मूर्ति शिखर पुरुष हैं, वर्तमान वातावरण में चल रही सभी विसंगताओं एवं विपरीतताओं से बहुत दूर हैं, उनकी निर्दोष आहार चर्या से लेकर सभी धार्मिक किर्याओं में आपआज भी चतुर्थ काल के मुनियों के दर्शन का दिग्दर्शन कर सकते हैं.

चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परम्परा में चतुर्थ पट्टाचार्य श्री अजित सागर जी महाराज ने आपको इस परम्परा में पंचम पट्टाचार्य के रूप में आचार्य घोषित किया था, आचार्य श्री अजित सागर jiमहाराज ने अपनी समाधि से पूर्व सन १९९० में एक लिखित आदेश द्वारा उक्त घोषणा की थी. तदुपरांत उक्त आदेश अनुसार उदयपुर (राजस्थान) में पारसोला नामक स्थान पर अपार जन समूह के बीच आपका आचार्य शान्तिसागर ji महाराज की परम्परा के पंचम पट्टाचार्य पद पर पदारोहण कराया गया. उस समय से aajआज तक निर्विवाद रूप से आचार्य श्री शान्तिसागर jiजी महाराज की निर्दोष आचार्य परम्परा का पालन व् निर्वहन कर रहे हैं. आपका वात्सल्य देखकर भक्तजन नर्मीभूत हो जाते हैं, आपकी संघ व्यवस्था देखकर मुनि परम्परा पर गौरव होता है. पूर्णिमा के चंद्रमा के समान ओज धारण किए हुए आपका मुखमंडल एवं सदैव दिखाई देने वाली प्रसन्नता ऐसी होती है कि इच्छा रहती है कि अपलक उसे देखते ही रहें. आचार्य श्री का स्पष्ट मत रहता है कि जहाँ जैसी परम्परा है, वैसी ही पूजा पद्दति से कार्य हो, इसको लेकर विवाद उचित नहीं. आचार्य श्री की कथनी और करनी में सदैव एकता दिखाई देती है, क्षमामूर्ति हैं, अपने प्रति कुपित भाव रखने वालों के प्रति भी क्रोध भाव नहीं रखते हैं. उनकी सदैव भावना रहती है कि जितात्मा बनो, हितात्मा बनो, जितेन्द्रिय बनो और आत्मकल्याण करो. guruआपमें विशेष गुरुguruभक्ति समाई हुई है, गुरुनिष्ठा एवं guru गुरुभक्ति के रूप में आपकी आचार्य पदारोहण दिवस पर कही गई ये पंक्तियाँ सदैव स्मरण की जाती रही है “चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्तिसागर jiमहाराज के इस शताब्दी में प्रवर्तित चारित्र साम्राज्य को हम संघ रूपी वज्रसंघ की मदद से संभाल सकेंगे. हम तो गुरुजनों से इस अभुदय की आकाशा करते हैं कि आपकी कृपा प्रसाद से परमपूज्य आचार्य श्री अजित सागर jजी महाराज ने आचार्य पद का जो गुरुतर भार सौंपा है, इस कार्य को सम्पन्न करने का सामर्थ्य प्राप्त हो.” आचार्य श्री वर्धमान सागर ji की दृष्टि में “चारित्र के पुन: निर्माण के लिए सूर्य के उदगम जैसे उद्भूत आचार्य श्री शान्तिसागर ji महाराज आदर्श महापुरुष हैं.”आप मुनि दीक्षा के बाद से आचार्य बनते हुए निरंतर निर्दोष रत्नत्रय का पालन करते हुए पूरे देश में धर्म की गंगा बहाते हुए लोगों को आत्म कल्याण के मार्ग पर आगे बढाते आ रहे हैं!

--- www.jinvaani.org @ Jainism' e-Storehouse ---

#Jainism #Jain #Digambara #Nirgrantha #Tirthankara #Adinatha #LordMahavira #MahavirBhagwan #RishabhaDev #Ahinsa #Nonviolence

#must_read_once unfortunately today "Happy cows" is a rare sight. we should all be aware of the horrible reality those beautiful animals lives.

10 Dairy Facts the Industry Doesn't Want You to Know
Dairy farming is based on the exploitation of female reproduction and the destruction of motherhood. The dairy industry also slaughters millions of babies and mothers.

#InterestingInfo आचार्य श्री विद्यासागर जी के पास आज भी वही कमण्डल है जो 47 वर्ष पूर्व उनके दीक्षा गुरु श्री ज्ञान सागर जी ने दीक्षा देते हुए प्रदान किया था । है न दुर्लभ जानकारी #AcharyaVidyaSagar

आचार्य श्री विद्या सागर जी और उनका त्याग।

1. 30 सालो से नमक का त्याग।
2. 30 साल से मीठे का त्याग।
3. सभी हरे फलो का त्याग।
4. सभी सूखे मेवो का त्याग।
5. भौतिक साधन जैसे A/C कूलर पंखा हीटर बिजली मोबाइल आदि का त्याग।
6. उम्र भर थूकने का त्याग।
7. जीवनभर चटाई का त्याग।
8. बिना बताये विहार करना।
9. बिना किसी घोषणा के दीक्षा देना।
10. आचार्य श्री की पिच्छी की कभी भी बोली नही लगती बल्कि जो संयम को लेता है उसे मिलती है।
11. आपका पूरा परिवार ही साधू बनकर मोक्ष मार्ग पर लगा है। ये तो सिर्फ पता हैं और न जाने क्या क्या गुरुवर ने त्याग कर रखा हैं वो तो भगवन ही जाने। ऐसे महान आचार्य श्री के
चरणों में मेरा कोटि कोटि नमन। 🙏

News in Hindi

Video

#watch_share 💡Just watch the heart melting / earth-rooting words By the little girl.. why she does not want eat animals ⚠️ #BeVegetarian #AnimalHaveSoul #AnimalFeelsPain

A leshya refers to the state of mind, mental attitude. Our activities reflect our attitude. Lets read and have contemplation over it to know what kinda mental attitude we posses if such happens with us like happened in the story! #must_read 🙃🙃

Share this page on: