13.07.2017 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Posted: 13.07.2017
Updated on: 14.07.2017

Update

#श्रवणबेलगोला में #बाहुबली_भगवन का मस्तकाअभिषेक 12 वर्षो में ही क्यों होता है #share

उत्तर: आचार्य भद्रबाहु 12000 मुनियो के संघ के साथ यहाँ आये थे, उन्होंने 12 वर्ष का सल्लेखना व्रत लिया था इसलिए भी!, बाहुबली जी के इस मूर्ति को बनने में 12 वर्ष लगे, खुद बाहुबली जी ने 12 महीने तक कठोर तप किया!

प्रश्न: विश्व की सबसे प्राचीनतम लिपि कौन-सी है?
उत्तर: प्राचीन ग्रंथो में उल्लेख है कि तीर्थंकर ऋषभदेव के ब्राह्मी और सुंदरी दो पुत्रिया थी! बाल्यअवस्था में वे ऋषभदेव कि गोद में जाकर बैठ गई! ऋषभदेव ने उनके विद्याग्रहण का काल जानकर उन्हें लिपि और अंको का ज्ञान दिया! ब्राह्मी दायी-और तथा सुंदरी बायीं-और बैठी थी! ब्राह्मी को वर्णमाला का बोध कराने के कारण लिपि बायीं और से लिखी जाती है! सुंदरी को अंक का बोध कराने के कारण अंक दायी से बायीं और इकाई, दहाई....के रूप में लिखे जाते है! ऋषभदेव ने सर्वप्रथम ब्राह्मी को वर्णमाला का बोध कराया था, इसी कारण सभी भाषा वैज्ञानिक एकमत से स्वीकार करते है कि विश्व कि प्राचीनतम लिपि ब्राह्मी है!

प्रश्न: 24 तीर्थंकरो के जो चिन्ह है वो कहा से आए या किसने रखे और उनका महत्व क्या है?
उत्तर: इस बारे में ग्रंथो में दो बाते मिलती है!
1. तीर्थंकर बालक के जन्म से ही दाहिने पैर के अंगूठे पर ये चिन्ह होता है और जब सौधर्म इंद्र तीर्थंकर बालक को लेकर पाण्डुक शीला, सुमेरु पर्वत जन्म अभिषेक के लिए जाता है तो इंद्र उस चिन्ह को देख कर घोषणा करता है की ये इन तीर्थंकर का चिन्ह होगा जैसे महावीर स्वामी का शेर! इसी से ही तीर्थंकर की पहचान होती है!
2. जब सौधर्म इंद्र तीर्थंकर बालक को लेकर सुमेरु पर्वत जन्म अभिषेक के लिए जाता है तो इंद्र के रथ की झंडे की ध्वजा में उस समय जो चिन्ह दिखाई देता है इंद्र उसको ही उन तीर्थंकर का चिन्ह घोषित कर देता है! #AcharyaVardhmanSagar #Shravanbelgola #GomteshwarBahubali

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Classification of #matter in Jainism -the Philosophy 😇 #worthyRead:)

The Jain acharyas (Jain #Saints) have extended a pretty scientific classification of matter (including #energy). The two main classes of matter are: elementary #particles (PARAMAANU) which was described earlier in post no. #11 (#Atomic theory according to Jainism @ Jainism -the Philosophy #11) and aggregates (SKANDH) that are agglomerates of elementary particles. Aggregates have been subdivided into the following six categories:

1. Extremely gross (STHOOL STHOOL) - solids such as metals, rocks and wood.

2. Gross (STHOOL) - liquids such as water and oil.

3. Mildly gross (STHOOL SOOKSHMA) - light energy, shadow and heat.

4. Slightly gross (SOOKSHMA STHOOL) - gaseous substances such as hydrogen, oxygen and chlorine. Further, invisible forms of energy such as sound energy belong to this category.

5. Slight (SOOKSHMA) - aggregates of matter related to our thought activity. They are known as material karmas (KAARMAANA VARGANA). These are affected by our thoughts and feelings. In turn, these aggregates of matter influence worldly souls and other aggregates of matter.

6. Extremely slight (SOOKSHMA SOOKSHMA) - extremely fine aggregates of matter such as electrons, protons and neutrons.

Note that light energy has been placed before gases, although the density of gases is considerably higher than that of radiation. It seems that the criterion of classification is visual perception and not density. Light energy can be seen while gases cannot be seen with our eyes. The things that can be detected with the eyes have been classified as mildly gross while the things that cannot be seen with the eyes, slightly gross.

In the above classification of matter, energy has been included with matter. The word ‘PUDGAL’ includes both, matter and energy. Thus according to Jain concepts, energy is also material. It too has the attributes of touch, taste, smell and color. Light is a form of material because it has color. And as stated above, a thing that manifests even one of the four attributes, necessarily has the remaining attributes as well. Thus light has touch, taste and smell as well although these attributes of light cannot be detected by our senses. Earlier, the scientists did not accept that energy is material. However, according to the theory of relativity and the theory of electronic structure of matter, it has been established that an electron, which is a universal constituent of matter, manifests a dual aspect - matter and energy. The relationship between matter and energy is given by

Energy = mass x (speed of light)2

Max Born in his celebrated work ‘Restless Universe’ states, “According to this theory (theory of relativity), mass and energy are essentially the same.
(Article written by Dr. Duli Chandra Jain)

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News in Hindi

❤️ ऊँचे ऊँचे शिखरों वाला हैं ये तीर्थ हमारा.. 🔥 #Shockking #SammedShikhar #share

हम थोडा जीभ के taste और Comfortable होने के चक्कर में सम्मेद शिखर जी की पवित्रता ख़तम करते जा रहे है, जो स्थान अपनी पवित्रता के कारन हमें नरक/पशु गति से बचाने वाला है और मोक्ष का होना निश्चित होना confirm कराने वाला है हम लोग उस स्थान की पवित्रता ख़तम करते जा रहे है, हम वहा जाते है और खूब chines food, fast food, रात को खाना खूब खाते है जैसे कोई भगवान् के दर्शन करने नहीं कही पिकनिक बनाने के लिए आये है, और तो और नया ड्रामा 'बिना अन्न की थाली' भी अब शिखर जी में मिलने लगी है और लोग खूब खाने लगे..भाई लोगो ये क्या है...धर्मं को ड्रामा बना लिया हमने और कुछ नहीं....क्या हम जब शिखर जी जाए तो 3-4 दिन भी बिना chines food, fast food के नहीं रह सकते? क्या हम मर जायेंगे अगर 3-4 दिन chines food, fast food नहीं खायेंगे [माफ़ करना अगर मेरा ये शब्द प्रयोग करना गलत लगा तो पर क्या करे हम taste चक्कर में पागल जैसे ही होगये है]

और शिखर जी के पहाड़ को तो हमने picnic spot और safari hill Place बना दिया और लगता है हम कोई discovery करने जा रहे है....boys Jeans, paint, Tees [t-shirts], Shirt में और Girls also in Jeans, Top, Kapri, Shorts और साथ में Shoes with stocking. उनके पास Mobile, कैमरा, Apple shuffle, Digital mp3 player और भी पता नि क्या क्या लेकर पर्वत पर जाते है और उनका Trendy Attire से तो लगता है जैसे क्या यही बस Mount Everest पर जा रहे है...और तो और साथ में Backpack [पीठ पर लटकाया जाने वाला थैला] भी लटका लेते है हा भैया बस उनको ही भूख लगती है...5 घंटे में बस यही कमजोर हो जायेंगे और यही लगता है की कभी खाना खाया ही नहीं...पहाड़ पर ही First time खायेंगे Life में...ये वो पर्वत है जहा से अनंत जीवो ने कर्म रूपी पर्वतो को चूर चूर कर और निर्वाण को प्राप्त किया...आपको पता है ये पर्वत अनादीकाल से है और अनंतकाल तक रहेंगा...तीर्थंकर हमेशा इसी पर्वत से मोक्ष गए और जायेंगे...

हमें पर्वत पर white dress में जाना चाहिए जैसे boys [men community] को white कुरता-पजामा या धोती-दुपट्टा में और वो भी सोला [शुद्ध] होना चाहिए...और female community को भी शालीन और शुद्ध वस्त्र पहन कर जाए, हो सके तो मोबाइल/camera ना लेकर जाए, नियम लेकर जाए पहाड़ पर कुछ नहीं खाऊंगा/खाऊंगा, पैरो में जूते/चप्पल नहीं पहनना चाहिए, जुराब भी नहीं, और पहाड़ पर कुछ नहीं खाना, पीना भी नहीं [Except some specific cases]...कुछ खरीदना नहीं...मस्ती/मजाक नहीं करना...'आत्मा को कुंदन बनाने वाली जिनवाणी के स्त्रोत तीर्थंकर भगवान् के मोक्ष स्थल पर हम जारहे है...जिस पथ पर चलकर हम भी जरुर एक दिन कुंदन हो सकेंगे...और उनके सामान सिद्धशिला पर विराजेंगे...'

भैया सोच बदली होगी हमें.....आओ हम प्रण करे की अब से हम शाश्वत तीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी पवित्रता बनाने में पूर्ण सहयोगी होंगे....अगर आप agree है तो ज्यादा से ज्यादा शेयर करे और लोगो को aware करे....

Nipun Jain -Admin

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