22.08.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►Chautha Day of Vaishnushan Parivar - Vani Samarthi Divas

Posted: 22.08.2017

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Jeevan Vigyan Academy


News in Hindi

पर्युषण पर्व का चैथा दिवस - वाणी संयम दिवस

पर्युषण पर्व का चैथा दिवस - वाणी संयम दिवस
कम बोलने से ऊर्जा का संयम होता है - मुनिश्री किषनलाल
हांसी, 22 अगस्त 2017।
प्रेक्षाप्राध्यापक ‘षासनश्री’ मुनिश्री किषनलालजी के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन में
चल रहे पर्यषण पर्व के चैथे दिन को ‘वाणी संयम दिवस’ के रूप में मनाया गया।
वाणी संयम दिवस पर बोलते हुए मुनि किषनलालजी ने कहा कि वाणी के संयम की
आवष्यकता है। अनेक ऐतिहासिक घटनाओं से स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि कई
बार अनावश्यक बोलने से अर्थ का अनर्थ हो जाता है भगवान महावीर के जीवन वृत
से चन्दनबाला के उदाहरण से स्पष्ट किया कि कम बोलने से ऊर्जा का संयम होता है।
वाणी अगर सोना है तो वाणी का संयम हीरा है। कम बोलने से बड़ी-बड़ी घटनाएं टल
सकती है। कुरुतियों पर प्रहार करते हुए मुनिश्री ने कहा कि संयम की भावना सर्वोपरी
है। सच्चा साधु वह होता है जो संयम की आराधना हर पल करता है और सबके प्रति
मंगल भाव रखता है। गृहस्थ मनुष्य कई बार श्रद्धा के कारण कुरुतियों को मंगल
भावना से जोड़ लेता है जबकि मंगलपाठ का अर्थ होता है कि हम हर प्रकार की
सम-विषम परिस्थितियों में संयम व धर्म को केन्द्र बिन्दु में रखें। इस अवसर पर
समाज के अनेक प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे।
तेरापंथ युवक परिषद के प्रधान राहुल जैन ने बताया कि तीन घंटे मौन के संकल्प के
साथ वाणी संयम दिवस मनाया गया। स्थानीय सभा के अध्यक्ष श्री दर्षन कुमार जैन
ने वाणी संयम पर बोलते हुए कहा कि भाषा किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व का आईना
है हम कम बोलें, धीरे बोलें, मीठा बोलें। अनावष्यक न बोलने से हमारी ऊर्जा की
बचत होगी।
- राहुल जैन

English by Google Translate:

Chautha Day of Vaishnushan Parivar - Vani Samarthi Divas
Energy is restrained by less speaking - Muni Kishan Lal

Observer 'Science Shree' at the thirapanth Sabha Bhavan in the proximity of Munishri Kishanlalji
The fourth day of the ongoing observatory festival was celebrated as 'Vani Samyam Din'.
Speaking on Vani Samyames Div, Muni Kishan Lalji said that the restraint of speech
Required. Explaining the many historical events, he said that many
Speaking of unnecessary times becomes a disaster for the meaning of the life story of Lord Mahavira
From the example of Chandnabala, I explained that less speaking is the restraint of energy.
If the voice is gold then the restraint of speech is diamond. Big things to avoid
May be. Predicting the karmas, Munishree said that the feeling of restraint all the way
is. A true saint is one who invokes restraint every moment and everybody
Mars Homemaker Many times, due to reverence,
Attaches to the feeling, whereas the mangal text means that we have all kinds of
Put the restraint and religion in the center point in the even-odd circumstances. on this occasion
Many enlightened people of the society were present.
Rahul Jain, head of the Tarapanth Yuva Parishad told that three hours of silence
Vani Samyama Diwas was celebrated along with The Chairman of the Local Sabha Mr. Dashan Kumar Jain
Speaking on Vani Samyama said that language is the mirror of any person's personality
We speak less, speak softly, say sweet. Our energy is not speaking unnecessarily
will save.

- Rahul Jain

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