23.08.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►Fourth Day of the Purushottana Gala - Nirvrat Consciousness Day

Posted: 23.08.2017

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Jeevan Vigyan Academy


News in Hindi

पर्युषण पर्व का चैथा दिवस - अणुव्रत चेतना दिवस
हांसी, 23 अगस्त 2017।
अणुव्रत अनुषास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती संत प्रेक्षाप्राध्यापक ‘षासनश्री’ मुनि किषनलालजी के सान्निध्य में चल रहे नौ दिवसीय पर्युषण पर्व का पांचवा दिन ‘अणुव्रत चेतना’ दिवस के रूप में मनाया गया।
मुनि किषनलालजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य तुलसी ने स्वस्थ समाज की संरचना के लिए अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया जो सभी के लिए जरूरी है। अणुव्रत आचार संहिता उल्लेख करते हुए मुनिश्री ने बताया कि - किसी भी निरपराध प्राणी का संकल्पपूर्वक वध नहीं करना, आत्म हत्या नहीं करना, भ्रूण हत्या नहीं करना, आक्रामक नीति का समर्थन नहीं करना, हिंसात्मक एवं तोड़फोड़ मूलक प्रवृत्तियों में भाग नहीं लेना, मानवीय एकता में विष्वास करना, व्यवसाय और व्यवहार में प्रमाणिक रहना, व्यसनमुक्त जीवन जीना जैसे आदि नियम सभी जाति वर्ग के लिए जरूरी है।
मुनिश्री ने यह भी बताया कि आज नषे की बड़ी समस्या है नषे की गिरफ्त में आने के बाद व्यक्ति का जीवन खराब हो जाता है, इस समस्या को ध्यान आदि के द्वारा समाधान किया जा सकता है और सैकड़ों लोगों ने समाधान पाया है इसके लिए कोई भी व्यक्ति संपर्क कर सकता है। 
मुनिश्री ने यह भी बताया कि सुप्रीम काॅर्ट ने तीन तलाक जैसी प्रथा पर रोक लगाकर महिलाओं के लिए सराहनी कार्य किया है जो छोटी सी बात पर तीन बार तलाक बोलकर महिलाओं के साथ अन्याय होता था उससे मुक्ति मिलेगी और महिलाएं सम्मान के साथ जी सकेगी।
अणुव्रत समिति के अध्यक्ष श्री अशोक जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अणुव्रत के नियमों से विद्यार्थी व षिक्षक वर्ग में संयम की भावना पुष्ठ होती है जिससे अच्छे भविष्य का निर्माण होता है।
इस अवसर पर तेरापंथी सभा, अणुव्रत समिति, तेरापंथ युवक परिषद्, तेरापंथ महिला मण्डल, कन्या मण्डल, किषोर मण्डल  आदि संस्थाओं के श्री दर्षन कुमार जैन, श्री सुभाष जैन, श्री रविन्द्र जैन, श्रीमती सरोज जैन आदि अनेक समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। ज्ञातव्य है कि हांसी के तेरापंथ सभा भवन में मुनिवृन्दों के सान्निध्य में प्रतिदिन लगभग दो सौ श्रावक-श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति रहती है।
- अषोक सियोल

English by Google Translate:

Fourth Day of the Purushottana Gala - Nirvrat Consciousness Day

On the fifth day of 'Nirvrat Chetna' day of the nine-day 'Purushottana' festival in the proximity of Munshi Kishanlalji, celebrated Saint Anshastra Acharyashree Mahishram's observant saint observer, 'Shanshan Shree' was celebrated.
Muni Kishan Lalji in his remark said that Acharya Tulsi initiated the atomic agitation for the structure of a healthy society which is essential for all. While mentioning the code of atomic code, Munishree said that - Do not kill slaves of any innocent person, do not kill self, do not kill fetus, do not support aggressive policy, do not participate in violent and subversive fundamental tendencies, human unity It is necessary for all caste classes to believe in living, being honest in business and practice, living a life free of addiction, etc.
Munishri also told that today is a big problem of Naushah after the fall of the person, the life of the person gets spoiled, this problem can be solved by meditation etc. and hundreds of people have found solution for this The person can contact.
Munishree also informed that Supreme Court has done commendable work for women by restricting the practice of three divorces which would be freed on three occasions by saying divorce and injustice would have been done to women and women would be able to live with respect.
Mr. Ashok Jain, President, Nirvrat Committee, while expressing his views, said that due to the rules of atomic science, there is a sense of restraint in the students and the education class, which builds a good future.
On this occasion, distinguished citizens of many societies were present on the occasion like Teerpanthi Sabha, Nirvrat Samiti, Terapanth Yuuk Parishad, Tarapanth Mahila Mandal, Kanya Mandal, Kishor Mandal etc. among others such as Shri Darshan Kumar Jain, Shri Subhash Jain, Shri Ravindra Jain, Smt. Saroj Jain etc. It is known that there is a good presence of about two hundred Shravakas and Shravastika every day in the vicinity of the Munivundas at the Trestanth Sabha Hall of Laughter.
- Ashok Sion

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