05.09.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►Yoga and non-Yoga makes health: Muni Kishan Lal

Posted: 06.09.2017

http://www.herenow4u.net/fileadmin/v3media/pics/organisations/Jeevan_Vigyan_Academy/Jeevan_Vigyan_Logo__New_.jpg

Jeevan Vigyan Academy


News in Hindi

योग और अयोग बनाता है निरोग: मुनि किशनलाल
हांसी, 5 सितम्बर 2017

योग और अयोग बनाता है निरोग जैन परंपरा में बन वचन और काया को योग कहा गया है मनायोग, वचन योग और कायायोग तीनों की गति का नहीं होना अयोग कहा गया है। योग क्रियात्मक है अयोग अक्रिय है पतंजलि महोदय ने अष्टांग योग में आसन प्राणायाम को स्थान देकर धारणा करना और समाधि तक पहुंचाने का उपक्रम बताया। यह क्रिया का क्रम है। जिस तहर भरी हुई हवा के डिब्बे को खोलना सरल होता है। हवा निकाल कर खाली डब्बे को खोलना कठिन हो जाता है। योग क्रिया है अयोग अक्रिया है। क्रिया से अक्रिया अधिक शक्तिशाली होती है। योग से अयोग की क्षमता अधिक होती है उससे जीव चार कर्मों का क्षय कर सिद्ध अवस्था को प्राप्त हो जाता है। उक्त विचार प्रेक्षाप्राध्यापक ‘शासनश्री’ मुनिश्री किशनलालजी ने पुराना सीनेमा गली स्थित जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा भवन में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

मुनिश्री ने आगे कहा - भगवान महावीर शिष्य गोतमगणधर ने पूछा योग के प्रत्याख्यान से क्या होता है? भगवान ने कहा योग - मन, वचन, काया की प्रवृत्ति का त्याग करने से अप्रकंपन होता है। अयोगी नए कर्मों का बंधन नहीं करता जो पूर्व कर्म चेतना पर थे उनका क्षय का सिद्ध और मुक्त हो जाता है। मुक्त अवस्था ही पूर्ण निरोग है। वह हर रूप सद्चिद् आंनद में अवस्थित हो जाता है।

मुनिश्री ने चतुर्दशी व पूर्णिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि चतुर्दशी और पूर्णिमा को दुर्घटनाएं अधिक होती है। क्योंकि इस दिन शरीर में ज्वार भाटा का प्रयोग होता है जिस तरह समुद्र में अमावस व पूर्णिमा को ज्वार भाटा आता है वैसे ही हमारे शरीर में ज्वार भाटा आता है। हमारे शरीर में पसीना नमक का पानी है। उसमें ज्वार भाटा आता है। इसलिए उक्त दिनों में नमक बिना भोजन के करना चाहिए। जिससे मस्तिष्क में कठिनाई कम हो जाती है।
- राहुल जैन

English by Google Translate:

Yoga and non-Yoga makes health: Muni Kishan Lal

Yoga and non-Yoga are made in the Nirig Jain tradition, Yoga is said to be made in verse and Kaya. Manoj, Yoga and Kaya Yoga are not the motions of the three. Yoga is functional; Ayyog is inactive; Patanjali said in the Ashtanga Yoga the position of Asana Pranayam and the concept of reaching and reaching the meditation. This is the order of verb. It is easy to open the tahrain filled air box. It is difficult to open the blank box by removing air. Yoga verb is a non-negotiable act. The action is more powerful than the action. Yoga is more of the capacity of non-Yoga, and the result is achieved by decaying the four karmas. The views expressed by the observer, 'Government Shree', Munishri Kishan Lalji, addressing the devotees present at the Jain Svetambar Terrapanthy Sabha Bhawan, located in the old Sinama valley.

Munishri further said - Lord Mahavira disciple Gotmagandhara asked what happened to the rejection of yoga? God said yoga - abandoning the tendency of mind, word and action, is uncontrollable. Unaware does not bind new karmas, which were on previous consciousness consciousness and proved to be free of decay. The free state is full health. Every aspect of it gets settled in peace.

Munishri mentions Chaturdashi and Purnima, said that Chaturdashi and Purnima are more accidents. Because on this day the use of tide bhas is used in the body, just as the Amavas and Purnima are recharged by the sea in the sea, just like our body comes tidal jaundice. The sweat of our body is salt water. There is tidal bets in it. Therefore, in the said days salt should be eaten without food. By which the difficulty in the brain decreases.

- Rahul Jain

36888477972

2017.09.05 Jeevan Vigyan Academy News 01

37059239285

2017.09.05 Jeevan Vigyan Academy News 02

36888478572

2017.09.05 Jeevan Vigyan Academy News 03

Share this page on:

Source/Info

jeevan vigyan