06.09.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►Auditorium Prenatal Cognition Camp

Posted: 06.09.2017

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Jeevan Vigyan Academy


News in Hindi

प्रेक्षाध्यान पूर्वजन्म अनुभूति शिविर 7 सितम्बर से
चेतना अतीत में थी, वर्तमान में है और भविष्य में भी रहेगी: मुनिश्री
हांसी, 9 सितम्बर 2017


प्रेक्षाध्यान, कायोत्सर्ग, अनुप्रेक्षा तथा संकल्प और प्राण प्रयोग से पूर्वजन्म अनुभूति की जा सकती है। चेतना अतीत में थी। वर्तमान में है, भविष्य में रहेगी। स्वस्थ और सुखी जीवन जीने की कला है - प्रेक्षाध्यान। प्रेक्षाप्राध्यापक मुनिश्री किशनलालजी ने प्रेक्षाध्यान अनुभूति शिविर के पहले दिन तेरापंथ भवन में अपने प्रवचन में बताया।

शिविर संयोजक श्री सुभाष जैन व श्री राहुल जैन ने बताया कि प्रेक्षाध्यान पूर्वजन्म अनुभूति आवासीय शिविर 7 सितम्बर से 10 सितम्बर तक चलेगा, शिविर में केवल पुरुष ही भाग ले सकते हैं। शिविर में भाग लेने वाले इच्छुक व्यक्ति प्रातः 9 बजे तक समय पर पहुंच कर लाभ ले सकते हैं। शिविर जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा आयोजित है जिसमें कोई भी इच्छुक व्यक्ति भाग ले सकता है।

मुनिश्री किशनलाल जी ने आगे बताया कि वीतराग बनने का मार्ग है। शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक शांति और भावनात्मक विकास स्वयं के साक्षात्कार की विधि है। मुनिश्री आगे कहा जैन-अजैन यह केवल पहचान है। अच्छा इंसान बनना प्रेक्षा की पहचान है। इस शिविर में कोई इंसान अपने पिछले जीवन को देखकर अपनी दिशा और दशा को बदल सकता है जिस व्यक्ति के मन में अपने आपको बदलने की भावना हो वह इस शिविर में भाग ले सकता है।

-  राहुल जैन

English by Google Translate:

Auditorium Prenatal Cognition Camp from Sep 7
Consciousness was in the past, is present and will be in the future: Muni Kishanlal

Perception can be experienced through observation, practice, precautions and determination and prana use. Consciousness was in the past. Currently, will remain in the future. The art of living a healthy and happy life - Observance Observer Munishree Kishanlalji told in his discourse on the first day of the Observatory Cognition Camp in Thirapanth Bhawan.

Camping Convener Mr. Subhash Jain and Mr. Rahul Jain informed that the observation of Pravatakshyan Prenatal Cognition Residential Camp will be held from 7th September to 10th September, only men can participate in the camp. Interested persons participating in the camp can avail the benefits by reaching up to 9 in the morning. The camp is organized by Jain Schwartambar Tervanti Sabha in which any interested person can participate.

Munishri Kishan Lal Ji further said that there is a path to becoming the Vitarag. Physical health is a method of mental peace and emotional development itself interviewing. Munishri further said, Jain-Ajayn is the only identity. Becoming a good person is the identity of the audience. In this camp a person can change his direction and condition by looking at his previous life, the person who has a feeling of change in his mind can participate in this camp.

- Rahul Jain

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