10.09.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►Ancestral Cognition Science

Posted: 10.09.2017

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Jeevan Vigyan Academy


News in Hindi

पूर्वजन्म अनुभूति षिविर सम्पन्न
तेरापंथ भवन में पूर्वजन्म अनुभूति में उत्तरे षिविरार्थी
अद्भुत अनुभवन करने वाले षिविरार्थियों ने अपनी अनुभूति व्यक्त की
हांसी, 10 सितम्बर 2017

प्रेक्षाप्राध्यापक ‘षासनश्री’ मुनिश्री किषनलालजी के सान्निध्य में पूर्वजन्म अनुभूति षिविर का समापन हुआ। षिविर के समापन पर भाग लेने वाले षिविरार्थियों ने अपने अनुभव बताये जिसमें जींद से आए श्री नारायणसिंह ने बताया कि प्रयोग के समय अर्धचेतन अवस्था में गया। वहां अनुभव किया कि मैंने वहां पूर्वजन्म की स्थिति को जाना। दिल्ली नोएडा से आए राहुल जैन ने बताय कि वह एक पहाड़ पर कुटिया में सन्यासी था। वहां महामृत्युन्जय का जप कर रहा था और मेरी मृत्यु भी पानी में डूबने से हुई मुझे आज भी पानी से भय लगता है।

दयान्द तिवारी ने बताया कि मेरा पिछला जन्म राजस्थान के राजपूत परिवार में हुआ मैं वहां लाल पगड़ी धोती में अपने आपको देखा वहां एक गोल चैक की हवेली थी मैं 60 वर्ष की अवस्था का था। दिव्यम जैन ने अपने पूर्वभव में अपने आपको पक्षी के रूप में देखा।

अनुराग जैन ने बताया कि मुझे शांति के साथ कुछ अनुभव किया मैं किसी विषेष स्थान पर ध्यान का आनन्द ले रहा हूं।

इस अवसर पर प्रेक्षाप्राध्यापक ‘षासनश्री’ मुनिश्री किषनलालजी ने कहा कि पूर्वजन्म अनुभूति कोई चमत्कार और दिखावा नहीं है। पूर्वजन्म की अनुभूति आत्मा के अस्तित्व की स्वीकृति है। नास्तिकता से आस्तिकता की अनुभूति है, ध्यान और अध्यात्म की अनुभूति है। कार्य दक्षता का विकास है। अपने किए हुए पूर्वजन्मों के असत् कर्मों का निर्मलीकरण है। इससे आध्यात्मिकता, वैज्ञानिकता का निर्माण किया जाता है। भय से मुक्ति और जीवन का नव निर्माण किया जाता है।

मुनिश्री ने आगे कहा कि जाति स्मृति का यह प्रयोग भगवान महावीर ने सम्राट श्रेणिक के पुत्र मेघकुमार पर किया उसे साधना में स्थिर कर अध्यात्म पथ पर स्थित किया। षिविर में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष दर्षन कुमार जैन, षिविर संयोजक सुभाष जैन, तेरापंथ युवक परिषद के प्रधान राहुल जैन, प्रषिक्षक महेन्द्र कुमावत, अषोक सियोल, सुरेष आदि का विषेष सहयोग रहा।

- राहुल जैन

English by Google Translate:

Ancestral Cognition Science
Answers in ancient cognition in the Tharapanth Bhawan
Patients who have a wonderful experience expressed their feelings

Prenatal cognition cessation was concluded in the proximity of observer 'Science Shree' Munishri Kishanlalji. The participants who participated in the concluding ceremony of Shishir gave their experiences, which came from Jind, Shri Narayansingh said that during the experiment, in the semi-conscious state. There I experienced that I know the situation of paternal ancestor there. Rahul Jain, who came from Delhi Noida, told that he was a monk in a cottage on a mountain. I was still chanting Mahamrityunjaya and due to my death by water drowning, I still fear water.

Dayanand Tiwari told that my last birth was in the Rajput family of Rajasthan. I saw myself in a red turban dhoti, there was a round check mansion. I was 60 years old. Divya Jain saw himself as a bird in his prehistory.

Anurag Jain told that I had some experience with peace, I am enjoying meditation at a special place.

On this occasion, observer 'Mission Shree' Munishri Kishanlalji said that prenatal cognition is not a miracle and a pretense. The perception of ancestral soul is the acceptance of the existence of the soul. Atheism is the experience of belief, the feeling of meditation and spirituality. Work efficiency is development. The purification of the untouchables of their predecessors. This creates spirituality, scientism. Freedom from fear and life is newly created.

Munishri further said that this experiment of caste memory was done by Lord Mahavir on the son of the emperor class Meghkumar, and he stabilized him in spiritual practice on the spiritual path. Jivan Shvetambar Thoranththi Sabha President Dashan Kumar Jain, Shiveir Convenor Subhash Jain, Tarapanth Yuvak Parishad President Rahul Jain, talent Mahendra Kumawat, Ashok Siol, Suresh etc. were specially cooperative.

- Rahul Jain

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