11.09.2017 ►Media Center Ahinsa Yatra ►News

Posted: 11.09.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति
गोवा की राज्यपाल डा. मृदुला सिन्हा महातपस्वी की सन्निधि में हुई पुरस्कृत
-42वें अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के अधिवेशन का शुभारम्भ पूज्यश्री की पावन सन्निधि में
-आचार्यश्री के पावन दरबार में राजस्थान की उच्च शिक्षामंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने भी लगाई हाजरी
-आचार्यश्री ने सत्यता को किया व्याख्यायित, कहा सच्चाई के लिए ऋजुता आवश्यक
-समस्याओं के निदान के लिए आते हैं युग पुरुष आचार्यश्री महाश्रमण जैसे महात्मा: गोवा राज्यपाल
-आचार्यश्री ने महिला मंडल को किया वर्धापित, राज्यपाल और शिक्षामंत्री को भी शुभाशीष से किया अच्छादित
-महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी ने अपने उद्बोधन में महिलाओं को निरंतर विकास करने की दी प्रेरणा
-शिक्षामंत्री ने कहा: आपकी दुर्गम और सुदूर पैदलयात्रा ने लोगों की चेतना को कर दिया है जागृत
-राज्यपाल को महिला मंडल ने आचार्य तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार वर्ष 2017 से किया सम्मानित

11.09.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः सोमवार को जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में गोवा की राज्यपाल व प्रसिद्ध साहित्यकार डा. मृदुला सिन्हा को अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा अपने 42वें वार्षिक अधिवेशन के दौरान आचार्य तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार वर्ष 2017 से सम्मानित किया। इस अवसर पर राजस्थान सरकार की उच्च शिक्षामंत्री श्रीमती किरण माहेवश्वरी भी उपस्थित रहीं। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में पहुंची गोवा की महामहिम व शिक्षामंत्री ने आचार्यश्री के संपूर्ण प्रवचन का श्रवण किया और लगभग उनकी मंगल सन्निधि में एक घंटे तक आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के बाद अपनी-अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति देकर आचार्यश्री से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।

    तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, महातपस्वी, अखंड परिव्राजक आचार्यश्री महाश्रमणजी सोमवार को महाश्रमण विहार के अध्यात्म समवसरण में विराजमान हुए तो आज उनके समक्ष दुनिया में आधी आबादी के नाम से जानी जाने वाली नारी समाज विशाल उपस्थिति थी। प्रसंग था अखिल भारतीय महिला मंडल के 42वें वार्षिक अधिवेशन के शुभारम्भ का। आचार्यश्री के मंगल सन्निधि में अधिवेशन का शुभारम्भ आचार्यश्री के मंगल महामंत्रोच्चार से हुआ।

    उसके उपरान्त सर्वप्रथम तेरापंथ धर्मसंघ की असाधारण साध्वीप्रमुखाजी ने अपना उद्बोधन प्रदान करते हुए कहा कि पूर्वाचायों के आशीर्वाद से समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने का जो अवसर प्राप्त हुआ, उसके बाद महिलाओं ने नित नई ऊंचाइयों को छुआ है। महिलाएं केवल आधुनिकता की दिशा में ही नहीं, आध्यात्मिकता, धार्मिकता के क्षेत्र में भी अपना स्थान बनाया है। उन्होंने राज्यपाल महोदया से महिलाओं को भी प्रेरणा प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरित किया।

    महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी के उपरान्त प्रभावी प्रवचनकार आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने मंगल प्रवचन में सत्य को व्याख्यायित करते हुए कहा कि दुनिया में सच्चाई का परम महत्त्व है। दुनिया में मुख्य तीन शक्तियों में एक शक्ति सच्चाई होती है। सच्चाई की शत-प्रतिशत साधना तो कोई न भी कर सके, किन्तु जितनी ज्यादा सच्चाई की साधना हो सके आदमी को करने का प्रयास करना चाहिए। सबकुछ सत्य पर आधारित है। आचार्यश्री ने एक दोहा-‘साच बरोबर तप नहीं, झूठ बरोबर पाप। जाकेें हृदय सांच है, ता हृदय प्रभु आप’ को आचार्यश्री ने वर्णित कहा कि सच एक तप के समान है और झूठ पाप है। जिसके हृदय में सच्चाई हो उसके हृदय में प्रभु का निवास हो जाता है। सच्चाई की साधना कठिन है। उसके सामने अवरोध, संघर्ष, विरोध आ सकते हैं, किन्तु सभी मुश्किलों का सामना करने की मन में ठान ले तो सच्चाई को प्राप्त कर सकता है। आचार्यश्री ने सच्चाई के लिए ऋजुता को आवश्यक बताते हुए सच्चाई के चार प्रकारों का वर्णन किया और लोगों को सच्चाई के पथ पर चलने की पावन प्रेरणा प्रदान की।

    आचार्यश्री ने अहिंसा यात्रा के तीन सूत्रों सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि भारत में ऐसी नैतिकता और सच्चाई की स्थापना हो जाए कि भारत तालामुक्त बन जाए, तो भारत के लिए बहुत बड़े आदर्श की बात हो सकती है। भारत को संतों की भूमि होने का सौभाग्य प्राप्त है तो वहीं भारत के पास धर्मग्रंथों के रूप ज्ञान का भी अकूत खजाना है। आचार्यश्री को इनके माध्यम से सच्चाई व नैतिकता के रास्ते पर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री महिला मंडल को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि यह अपने ढंग से कार्य करने वाली संस्था है। इस संस्था के पास भी प्रतिभा की अपनी संपदा है। राज्यपाल महोदया को आचार्य तुलसी के नाम से जुड़ा हुआ सम्मान देने का निर्णय किया गया, यह भी अच्छी बात है। जो लोग अच्छा काम करने वाले हैं, उन्हें सामने लाने और पुरस्कृत करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि दूसरों को भी अच्छा कार्य करने की प्रेरणा प्राप्त हो सके।

    आचार्यश्री की पावन प्रेरणा के उपरान्त गोवा की राज्यपाल डा. मृदुला सिन्हा के जीवनी, और आचार्य तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार से संबंधित डाक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। इसके उपरान्त राज्यपाल महोदया को कोलकाता चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री कमल दुगड़ सहित महिला मंडल की उपस्थित पदाधिकारियों द्वारा ‘आचार्य तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार’ प्रदान किया गया।

    पुरस्कार प्राप्त करने के उपरान्त गोवा की राज्यपाल व प्रसिद्ध साहित्याकर डा. मृदुला सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि आज आचार्यश्री महाश्रमणजी जैसे संत में चरणों में सम्मान प्राप्त कर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञजी से प्रेरणा प्राप्त करने के उपरान्त आज आचार्यश्री महाश्रमणजी की सन्निधि में उपस्थित हूं। उन्होंने आचार्य तुलसी को उस समय की समस्याओं को दूर करने व महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए किए प्रयास के लिए युगपुरुष कहते हुए आचार्यश्री महाश्रमणजी को भी युगपुरुष बताया और कहा कि वर्तमान की समस्याओं को दूर करने के लिए ऐसे महान संतों का आगमन होता है। आज की समस्याओं को दूर करने के लिए ही आचार्यश्री महाश्रमणजी अहिंसा यात्रा लेकर निकले हैं। आचार्यश्री के प्रवचन को सुनकर उन्हें हृदयंगम करने से मन को अपार शांति की अनुभूति हो रही है। स्वच्छ भारत अभियान की ब्रांड अम्बेस्डर होने के नाते उन्होंने आचार्यश्री के समक्ष संकल्प लिया कि मैं अपने लिए कार्यों की गति और अधिक बढ़ा दूंगी।

    इसके पूर्व राजस्थान सरकार की उच्च शिक्षामंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने भी आचार्यश्री के समक्ष अपने संबोधन में कहा कि आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी अहिंसा यात्रा लेकर भारत के जिन दूर क्षेत्रों में पदयात्रा कर लोगों को जागृत किया वह अपने आप में महान कार्य है। नैतिकता की जो अलख आचार्यश्री जगा रहे हैं, उसमें हम सभी सहभागी बनें। उन्होंने आचार्यश्री से प्रार्थना करते हुए कहा कि राजसंमद में आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के नाम से चिकित्सा या शिक्षा के कोई भी निर्माण हो तो मैं उसके लिए संपूर्ण भूमि उपलब्ध कराने को तैयार हूं। वहीं श्रीमती तरुण तारण राय ने भी आचार्यश्री के समक्ष विचाराभिव्यक्ति दी।

    अंत में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती कल्पना बैद ने आभार ज्ञापित किया संचालन श्रीमती सायरदेवी बेंगानी ने किया। शासनश्री साध्वी जयश्री द्वारा साध्वीप्रमुखाजी की जीवनी पर आधारित लिखित, व जैन विश्वभारती द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘तुलसी युग की तरुणिमा कनकप्रभा’ को आचार्यश्री के समक्ष जैन विश्वभारती के पूर्व अध्यक्ष श्री धर्मचंद लुंकड़, कोलकाता चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री कमल दुगड़ व श्री पुखराज बड़ोला आदि लोकार्पित कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।

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