12.09.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►Muni Kishanlal

Posted: 12.09.2017

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Jeevan Vigyan Academy


News in Hindi

मन की धारणाओं को बदलें: मुनिश्री किषनलाल
12 सितम्बर 2017

मनुष्य एक संघी प्राणी है। संघी प्राणी वह होता है जिसका मन होता है। मन का कार्य होता है चिन्तन करना, स्मृति करना व कल्पना करना ‘मन के तीन स्तर हैं - जाग्रत अवस्था, अर्धजाग्रत अवस्था व अजाग्रत अवस्था। मन मनुष्य के पास एक शक्तिषाला यंत्र है वह अपना विवेक जागृत कर इसे अध्यात्म में नियोजित कर सकता है। उक्त विचार आगमवाणी के प्रवचन करते हुए आचार्यश्री महाश्रमणजी के आज्ञानुवर्ती प्रेक्षाप्राध्यापक ‘षासनश्री’ मुनिश्री किषनलालजी ने तेरापंथ भवन में कहे।

उन्होंने आगे कहा कि हम अपनी धारणा व दृष्टिकोण में बदलाव लाएं विचार आना बुरी बात नहीं है परन्तु विचारों के साथ विकार जोड़ना मन में विकार उत्पन्न करता है। हमारा मन शक्तिषाली है यह ब्रेन व स्पाईन के माध्यम से हमारी इन्द्रियों को प्रभावित करता है। मांसपेषियों की सहायता से हमारी इन्द्रियां कार्य करती है। चंचलता हमारे कर्मों की निर्जरा में बाधक है। शरीर मन व विचारों की चंचलता रोकने के लिए मुनिश्री किषनलालजी ने अनिमेष प्रेक्षा का प्रयोग करवाया।

इस अवसर पर सभा अध्यक्ष दर्षन कुमार जैन, मंत्री चिराग जैन आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
- राहुल जैन

English by Google Translate:

Change the notions of mind: Munishri Kishan Lal
12 September 2017

Man is an accomplished creature. The Sanghi creature is the one whose mind has. The work of the mind is meditation, memory and imagination. There are three levels of mind - the awakened state, the mediocre state and the unknowable state. Man has a powerful weapon that man can awaken his conscience and employ it in spirituality. Speaking of the above thoughts, Acharyashree Mahishramji's intuitive observer professor, 'Shashan Shree', Munishri Kishan Lalji said in the Terrapanth Bhavan.

He further said that it is not a bad idea to bring ideas to change in our perceptions and attitude, but adding disorders to thoughts creates a disorder in the mind. Our mind is powerhouse, it affects our senses through brain and spine. Our senses work with the help of muscles. Adjustment prevails in the way of our actions. Munishri Kishanlalji used the high level of expression to stop the restlessness of body mind and thoughts.

On this occasion, Speaker Darshan Kumar Jain, Minister Chirag Jain etc. were present on the occasion.

- Rahul Jain

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