11.11.2017 ►TMC ►Terapanth Center News

Posted: 11.11.2017
Updated on: 14.11.2017

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📣 #अहिंसा_यात्रा पश्चिम बंगाल में:-

शांतिदूत #आचार्य_श्री_महाश्रमण जी लगभग 11 किमी विहार करके अझापुर पधारे। गुरुवर के पावन सान्निध्य से आज के विहार की मनोरम #झलकियां एवं आचार्यवर का प्रेरणा पाथेय।

11.11.2017
प्रस्तुति > #तेरापंथ मीडिया सेंटर
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दूसरी बार #शांतिदूत के चरणरज पा निहाल हुआ आझापुर

-वर्धमान में प्रवर्धमान #अहिंसा_यात्रा पहुंची वर्धमान जिले के आझापुर गांव

-#आबूझाटी से लगभग #11_किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री पहुंचे आझापुर हाईस्कूल

-#आचार्य_श्री_महाश्रमण जी ने उपस्थित #श्रद्धालुओं को एकत्व की अनुप्रेक्षा कर मोह रूपी से पाप से बचने की दी पावन प्रेरणा

-#ग्रामीण बच्चों ने स्वीकार की अहिंसा यात्रा की #संकल्पत्रयी

11.11.2017 आबूझाटी, वर्धमान (पश्चिम #बंगाल):- खोती मानवता, बढ़ते अपराध, चरम पर पहुंच चुकी नशाखोरी और धर्म से विमुख होते लोगों के हृदय में मानवता के बीज अंकुरित करने, विकृत मानसिकताओं को आध्यात्मिकता का संपोषण देने, नशामुक्ति का संकल्प दिलाने और धर्म के मार्ग पर चलकर अपनी आत्मा और जीवन का कल्याण करने की प्रेरणा प्रदान करने के लिए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी अहिंसा यात्रा और धवल सेना के साथ वर्तमान में पश्चिम बंगाल की धरा को पावन बना रहे हैं। निरंतर प्रवर्धमान हो रही अहिंसा यात्रा वर्धमान जिले के गांवों में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की अलख जगा रही है।

इन्हीं जनकल्याणकारी संकल्पों वाली अहिंसा यात्रा अपने प्रेणता आचार्यश्री महाश्रमणजी के साथ शनिवार की सुबह आबूझाटी से आझापुर के लिए प्रस्थित हुई। आचार्यश्री दिल्ली कोलकाता को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या दो से होते हुए लगभग ग्यारह किलोमीटर का विहार कर वर्धमान जिले के आझापुर गांव पहुंचे। यह वहीं गांव जहां आचार्यश्री ने कोलकाता चतुर्मास के लिए कोलकाता पधारते समय भी अपने चरणकमल टिकाए थे। आज उसी गांव में लगभग पांच महीने में बाद आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ पुनः पधार गए थे। अब इसे आझापुर के किस्मत का प्रतिफल कहें या कुछ और क्योंकि जहां श्रद्धालुओं के क्षेत्र अपने आराध्य के एकदिवसीय प्रवास के लिए भी तरस जाते हैं, वहीं आझापुर को बिन मांगे दूसरी पर महातपस्वी संत के चरणरज को प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त हो रहा था।

आझापुर हाईस्कूल प्रांगण में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने अपने वचनामृत का पान कराते हुए कहा कि दुनिया में आदमी परिवार, समाज और देश में रहता है। उसका उनके प्रति लगाव का भाव होता है, लेकिन देखना यह आवश्यक होता है आदमी की अभिमुखता आत्मा की ओर है या पदार्थों की ओर। आदमी को दुनिया में रहते हुए भी ‘मैं अकेला हूं’ ऐसी अनुप्रेक्षा करे, फिर कोई सवाल यह भी है कि आदमी परिवार, समाज आदि के साथ रहते हुए भी अकेला कैसे हो सकता है? इसका उत्तर है कि आदमी अकेला जन्म लेता है, अकेला अपने कर्मों को पूर्ण करता है और अकेला ही मृत्यु को प्राप्त करता है। किसी भी मनुष्य के किसी भी क्रिया-कलाप में कोई सहयोगी नहीं होता। आदमी को अपने कर्मों का फल उसे स्वयं भोगना पड़ता है, इसलिए आदमी इस संसार में रहते हुए भी अकेला होता है। आदमी को अकेलेपन की अनुप्रेक्षा करने से आदमी मोह से दूर हो सकता है और मोह के कारण होने वाले पापों से भी बच सकता है। जब आदमी यह समझ ले कि अपने किए कर्मों का फल स्वयं भोगना पड़ता है तो आदमी को अपने को पाप कर्मों से बचाने और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। सम्यक् दृष्टि वाला मनुष्य अपने परिवार का भरण-पोषण इस प्रकार करता है, जैसे एक धाय माता बच्चे का पालन तो करती है लेकिन वह बच्चे के प्रति मोह नहीं करती, क्योंकि उसे पता होता है कि बच्चा उसका नहीं है। आदमी एकत्व की अनुप्रेक्षा कर अहंकार और मोह रूपी पापों से स्वयं को बचा सकता है और स्वयं को अध्यात्मिकता के क्षेत्र में आगे बढ़ा सकता है।

आचार्यश्री ने अपने समक्ष उपस्थित कुछ ग्रामीण बच्चों को अपने समीप बुलाया और उन्हें सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की पावन प्रेरणा प्रदान की और उन्हें अहिंसा यात्रा के संकल्पत्रयी प्रदान किया तो सरल हृदय से बच्चों ने भी महातपस्वी के श्रीमुख से प्राप्त हो रहे ज्ञान को ग्रहण कर आचार्यश्री का पावन आशीर्वाद भी प्राप्त किया।

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आचार्यश्री महाश्रमण जी की शिष्या समणी निर्मल प्रज्ञा जी ने *सर्प को सुनाया मंगलपाठ* विडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें ।

https://youtu.be/2NtUVBDNINo

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हिसार (हरियाणा) की उदयमान गायिका *सुधा जैन* का मार्मिक विदाई गीत सुनने के लिए लिंक पर क्लिक करें ।

https://youtu.be/BKS2On8MIck

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🙏 #जय_जिनेन्द्र सा 🙏

दिनांक- 11-11-2017
तिथि: - #माघशीर्ष कृष्णा #आठम (08)

#शनिवार त्याग/#पचखाण

★आज #बर्फी (#मिठाई) खाने का त्याग करे।
★ गुरुदेव के इंगितानुसार आज सायं 07 से 08 बजे के मध्य सामायिक करने का अवश्य प्रयास करे।

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जय जिनेन्द्र
#प्रतिदिन जो त्याग करवाया जाता हैं। सभी से #निवेदन है की आप स्वेच्छा से त्याग अवश्य करे। छोटे छोटे #त्याग करके भी हम मोक्ष मार्ग की #आराधना कर सकते हैं। त्याग अपने आप में आध्यात्म का मार्ग हैं।
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🙏तेरापंथ मीडिया सेंटर🙏

🔯 गुरुवर की अमृत वाणी 🔯
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