12.12.2017 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Posted: 12.12.2017
Updated on: 13.12.2017

Update

Vardhmana mahavira svami @ in a meditative as illustrated in the unique calligraphed edition of the Constitution of India 🇮🇳 #share_maximum

Update

Important message for all 75,000+ Likers & 10Lac reachers:) आचार्य विद्यासागर जी Laptop/ Mobile/ Tablet / Electronic gadgets USE नहीं करते हैं! ये पेज चलाने में आचार्य विद्यासागर जी की प्रेरणा/अनुमोदना नहीं हैं! Admin disclose their identity for transparency not for fame:))

जो भी picture/post/article/content इस पेज से शेयर किया जाता हैं वो सब ADMIN की समझ से किया जाता हैं! हम admin लोग अपनी समझ के अनुसार पेज चलाते हैं.. थोडा मत-भेद/ विचार-भेद होना Human Nature हैं! इस पेज का उदेश्य जिन धर्मं के core teachings/Crux को spread तथा जिन धर्मं के जीवंत प्रतिकृति मुनिराजो सहित जिसमे आचार्य विद्यासागर जी admin के नजरिये में आदर्श हैं, के प्रवचन आदि शेयर करना हैं! admin किसी भी भेदभाव जैसे पंथवाद /साधुवाद आदि में विश्वास नहीं रखते हैं.. तथा हम सब धर्मं का मर्म [ essence ] समझे.. ऐसी भावना रखकर पेज को चलाते हैं:) ।

This page is not an official page of 'Acarya Sri Vidyasagara Ji' and neither claimed here. Acarya Sri appreciation/ authorization/ permission has not been taken to run. It's just an effort to bring Jinvaani along his preaching's online, the extracts of Lord Mahavira teachings, including Jainism news/ events/ info/ photographs. ACHARYA VIDYASAGAR JI DOESN'T USE/TOUCH LAPTOP/COMPUTER OR MAINTAIN THIS PAGE. we might do plenty mistakes to holding the admin role of it, still try our best to deliver authenticated text here throughout the community. If ever we do err, we would be in the gesture of folding hands above all of you, because of our intention to spread the pure & without bias the true form of the Philosophy named by Jainism and in that journey being mistakes is common to be a human.

Peace & Happiness to ALL - thank You -Vaibhav Jain & Nipun Jain..

News in Hindi

शुभ दिवस की शुरुआत जिनेन्द्र देव के दर्शन के साथ। दर्शन कर नमोस्तु भगवान् जरूर लिखे।।।

दर्शनं देवदेवस्य, दर्शनं पापनाशनम्|
दर्शनं स्वर्गसोपानं, दर्शनं मोक्षसाधनम्|1|
दर्शनेन जिनेन्द्राणां, साधूनां वंदनेन च|
न चिरं तिष्ठते पापं, छिद्रहस्ते यथोदकम्|2|
वीतरागमुखं द्रष्ट्वा, पद्मरागसमप्रभं|
जन्म-जन्मकृतं पापं दर्शनेन विनश्यति|3|

देव दर्शन पाप का नाशकरनेवाला है ।
देवदर्शन स्वर्ग का सोपान है,स्वर्ग का वैभव देवदर्शन से मिलता है ।।
देव दर्शन के निमित्त में होनेवाला शुभभाव, उस शुभभाव के निमित्त से बंधाहुआ पुण्यकर्म, शुद्ध भाव से होनेवाली मोक्षकी प्राप्ती!
सब सुख धर्म से ही मिलते है ।
अच्छा फल चाहिये तोधर्म बढ़ाना चाहिये।धर्म सुख को कारण है ।

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