24.04.2018 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Published: 24.04.2018
Updated: 25.04.2018

Update

#वैयावृत्ति_का_अनूठा_उदाहरण आचार्य श्री विद्यासागर जी की जयकार करने मात्र से ही हुआ चमत्कार.. आचार्य श्री के २ शिष्य पहुचे वैयावृत्ति करने दुसरे संघ के साधू की.. @ दिल्ली --24/4/18 भोलेनाथ नगर दिल्ली #Share - #MustRead

संत शिरोमणि आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य 🔶मुनि श्री वीरसागर जी 🔶मुनि श्री विशाल सागर जी महाराज एवं 🔶मुनि श्री धवल सागर जी महाराज को (जो की बाहुबली एनक्लेव दिल्ली में विराजमान है) जैसे ही भोलेनाथ नगर की जैन समाज ने आकर बताया कि वहाँ विराजमान समाधिस्थ आचार्य श्री सन्मति सागर जी के शिष्य ♦मुनि श्री संकल्प भूषण महाराज जी का स्वास्थ्य अचानक ख़राब हो गया और उनका आधा शरीर काम नही कर रहा एवं मुँह से कुछ बोल भी नही पा रहे ।⭕तब मुनि द्वय श्री वीर सागर जी व विशाल सागर जी समाज के आग्रह पर एवं साधुता दर्शाते हुए चौके से सीधे भोलानाथ नगर की तरफ़ चले गये और जाकर मुनि श्री को आहार कराने में सहायक भी बने। ♦आहार के उपरान्त जैसे ही मुनि द्वय ने मुनि श्री संकल्प भूषण जी से आचार्य श्री को नमोस्तु करने को कहा वैसे ही उनके दोनो हाथ (जिसमें कि दायाँ हाथ काम नही कर रहा था) अपने आप उठ गये और पिच्छि उठाकर आचार्य भगवन को नमोस्तु किया और जिस गले से आवाज़ भी नही निकल रही थी उसी गले से आचार्य श्री का नाम भी निकल गया और ये भी बताया की उन्होंने आचार्य श्री को १९८४ में आहार भी करवाया हुआ है।

♦♦♦♦♦ये चमत्कार देखते ही पूरा अतिथि भवन आचार्य श्री विद्यासागर जी के जयकारों से गूँज उठा♦ धन्य है ऐसे आचार्य भगवन और उनके शिष्य 🙏🙏🙏 🎉🎉

दोनो मुनिराज अभी भी भोलेनाथ नगर में विराजमान है। आज सायं 5 बजे मुनि द्वय भोलानाथ नगर से विहार करके छोटा बाज़ार शाहदरा के दर्शन करते हुए वापिस बाहुबली एनक्लेव पहुँचेगे।

नमनकर्ता: अंशुल जैन दिल्ली#9911088083

#आत्मनवेषी........ परीषह-विजय

आचार्य महाराज का उन दिनों बुन्देलखण्ड में प्रवेश हुआ था। उनकी निर्दोष मुनि चर्या और अध्यात्म का सुलझा हुआ ज्ञान देखकर सभी प्रभावित हुए। कटनी में आए, कुछ ही दिन हुए थे कि महाराज को तीव्र ज्वर हो गया। पं. जगन्मोहनलाल जी की देखरेख में उपचार होने लगा। सतना में आकर नीरज जी भी सेवा में संलग्न थे। एक दिन मच्छरों की बहुलता देखकर पंडित जी ने रात्रि के समय महाराज के चारों ओर पूरे कमरे में मच्छरदानी लगवा दी। सुबह जब महाराज ने मौन खोला तो कहा कि यह सब क्या किया?पंडित जी ने तो पहले ही सोच लिया था, सो बोले कि “महाराज आप तो शरीर के प्रति निर्मोही हो, उपचार भी नहीं करने देते। पर क्या करे, ज्वर के कीटाणुओं से आपका शरीर इतना विषाक्त हो गया है कि आपको काटने वाले मच्छरों को पीड़ा होती है। उन बेचारों की सुरक्षा के लिए यह उपाय करना पड़ा।

आचार्य महाराज अस्वस्थता के बावजूद भी खूब हँसे। कहने लगे कि ''पंडित जी संसारी प्राणी अपने शरीर के प्रति अनुरागवश ऐसे ही तर्क देकर उसकी सुरक्षा में लगा है और निरन्तर दुखी है। मोक्षार्थी के लिए ऐसी शिथिलता से बचना चाहिए और परीषह-जय के लिए तत्पर रहना चाहिए। कर्म-निर्जरा तभी संभव होगी।'' पंडित जी क्या कहते? विनत भाव से आगम के अनुरूप आचरण करने वाले, परीषह-विजयी, शिथिलताओं से दूर और कर्म-निर्जरा में तत्पर आचार्य महाराज के चरणों में झुक गए और सदा के लिए उनके भक्त हो गए।

कटनी (1976)
मुनि श्री क्षमासागर जी

#WHO_IS_A_JIN? -Abdul Aziz Rajput..

A Jin is one who typifies the Jain dharma! Jin means Victor! conqueror! The ultimate and absolute aim of life is salvation - Mukti! Deliverance! Two powerful impediments to the attainment of salvation are attachment and hatred. These two have been considered the inner enemies. They are the two enemies that entangle the Soul (Atma) in the cycle of birth and rebirth. Such passions as desire, anger, miserliness, arroggance and envy are but the offspring or the manifestations of the two passions, namely, attachment and hatred. One who attains an absolute victory over these enemies is known as Jin. He is also known by other names.

#Arihanta - #ARI = enemy, #HANT = destroyer. One who destroys the inner enemies.

#Arhan - One who is worthy of being worshipped.

#Vitrag - One who is devoid of attachment and hatred.

#Sarvajna - One who knows everything -The Omniscient.

#Parameshthi - One who has attained the Parampad or the highest state.

#Sarvadarshi - One who is all-seeing.

These Jins have in their lives personally lived the dharma and showed to the world the path of attainment and that has become the dhama for Sadhakas, those who try to achieve it. The Jins give form to it; and hence it is named Jin dharma.

Abdul Aziz Rajput..

#वैयावृत्ति_का_अनूठा_उदाहरण आचार्य भगवन की जयकार करने मात्र से ही हुआ चमत्कार @ दिल्ली --24/4/18 भोलेनाथ नगर दिल्ली #Share

संत शिरोमणि आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य 🔶मुनि श्री वीरसागर जी 🔶मुनि श्री विशाल सागर जी महाराज एवं 🔶मुनि श्री धवल सागर जी महाराज को (जो की बाहुबली एनक्लेव दिल्ली में विराजमान है) जैसे ही भोलेनाथ नगर की जैन समाज ने आकर बताया कि वहाँ विराजमान समाधिस्थ आचार्य श्री सन्मति सागर जी के शिष्य ♦मुनि श्री संकल्प भूषण महाराज जी का स्वास्थ्य अचानक ख़राब हो गया और उनका आधा शरीर काम नही कर रहा एवं मुँह से कुछ बोल भी नही पा रहे ।⭕तब मुनि द्वय श्री वीर सागर जी व विशाल सागर जी समाज के आग्रह पर एवं साधुता दर्शाते हुए चौके से सीधे भोलानाथ नगर की तरफ़ चले गये और जाकर मुनि श्री को आहार कराने में सहायक भी बने। ♦आहार के उपरान्त जैसे ही मुनि द्वय ने मुनि श्री संकल्प भूषण जी से आचार्य श्री को नमोस्तु करने को कहा वैसे ही उनके दोनो हाथ (जिसमें कि दायाँ हाथ काम नही कर रहा था) अपने आप उठ गये और पिच्छि उठाकर आचार्य भगवन को नमोस्तु किया और जिस गले से आवाज़ भी नही निकल रही थी उसी गले से आचार्य श्री का नाम भी निकल गया और ये भी बताया की उन्होंने आचार्य श्री को १९८४ में आहार भी करवाया हुआ है।

♦♦♦♦♦ये चमत्कार देखते ही पूरा अतिथि भवन आचार्य श्री विद्यासागर जी के जयकारों से गूँज उठा♦ धन्य है ऐसे आचार्य भगवन और उनके शिष्य 🙏🙏🙏 🎉🎉

दोनो मुनिराज अभी भी भोलेनाथ नगर में विराजमान है। आज सायं 5 बजे मुनि द्वय भोलानाथ नगर से विहार करके छोटा बाज़ार शाहदरा के दर्शन करते हुए वापिस बाहुबली एनक्लेव पहुँचेगे।

🙏🙏🙏
नमनकर्ता: अंशुल जैन दिल्ली#9911088083

Update

"आइये जानते है मुक्तागिरी सिद्ध क्षेत्र के बारे में" इस पवित्र मंदिर पर आज भी होती है केसर और चंदन की बारिश।

सौंदर्य और धार्मिक स्थल मुक्तागिरी ऐसा स्थल है जहां माना जाता है कि केसर और चंदन की आज भी बारिश होती है। इस पवित्र स्थल पर दिगम्बर जैन संप्रदाय के 52 मंदिर हैं। एक से बढ़कर एक शिल्पकला का नमूना यहां की मूर्तियों में देखने को मिलता है। मन को सुख और शांति देने वाले इस स्थल पर सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। यह स्थान MP के बैतूल जिले की भैंसदेही में स्थित है।
थपोड़ा गांव में स्थित यह पवित्र स्थल धार्मिक प्रभाव के कारण लोगों को अपनी ओर खींचता है। यही कारण है कि देश के कोने-कोने से जैन धर्मावलंबी यहां आते हैं ही हैं, साथ ही दूसरे धर्मों को मानने वाले भी इस मनोहारी दृश्यों को देखकर भावविभोर हो जाते हैं।

सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के बीच हरे-भरे जंगलों में बसा है यह स्थल। बताया जाता है कि यहीं से साढ़े तीन करोड़ मुनिराज मोक्ष को प्राप्त कर चुके हैं। इसीलिए कहा गया है कि...

"अचलापूर की दिशा ईशान तहां मेंढागिरी नाम प्रधान
साढ़े तीन कोटी मुनीराय तिनके चरण नमु चितलाय"

शास्त्रों में इसका अर्थ बताया गया है कि साढ़े तीन करोड़ संतों को नमन करों, जिन्हें पवित्र नगरी अचलपुर के उत्तर-पूर्व मेढ़ागिरी के शिखर पर निर्वाण प्राप्त किया हो।

*यहां अक्सर होती है केशर की बारिश*-

मुक्तागिरी के मेढ़ागिरी नाम के पीछे किंवदंती है कि यहां अक्सर केशर की बारिश होती है। करी एक हजार वर्ष पहले आसमान से एक मेढ़ा ध्यानमग्न एक मुनिराज के सामने आकर गिरा था। ध्यान के बाद मुनिराज ने जब उस मरणासन्न मेढ़े के कान में नमोकार मंत्र पढ़ा, तो वह मेढ़ा मरने के बाद देव बन गया। अपने मोक्ष के बाद देव बने मेढ़ा को मोक्षदाता मुनिराज का ध्यान आया। तभी से निर्वाण स्थल पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा की रात में देव प्रतिमाओं पर केशर के छींटों का दर्शन होता है। यह कुदरती होने के कारण यह आज भी आश्चर्य का विषय बना हुआ है। केशर की यह बारिश 52 मंदिरों में से 10वें मंदिर में साफ देखी जा सकती है।

*मुक्तागिरी का दूसरा नाम है मेंढ़ागिरी*-

मुक्तागिरी का दूसरा नाम मेंढ़ागिरी भी है। निर्वाण कांड में इसका उल्लेख भी है। कहा जाता है कि इस क्षेत्र के 10वें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ का समवशरण आया था। ऐसा मोतियों की बारिश मानने से इसे मुक्तागिरी कहा जाने लगा। बताया जाता है कि भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन करने के लिए रोज अनेक श्रद्धालु आते हैं, जो बीमारी, भूत-पिशाच आदि सांसारिक परेशानियों को दूर करने की मंशा से आते हैं। लोगों की मनोकामना भी इस स्थान से पूरी हो जाती है।

श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है यहां का झरना
सतपुड़ा पर्वत की 250 फीट ऊंचा झरना भी है, जो प्राकृतिक सौंदर्य को और भी बढ़ा देता है। यहां दूर-दूर तक फैली हरियाली, पेड़-पौधे, पूरे क्षेत्र को और भी आकर्षक बना देते हैं। यहां आने वाले लोग एक अलग ही प्रकार का शांत वातावरण महसूस करते हैं। 52 मंदिरों के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को 250 सीढ़ियां चढ़कर 350 सीढ़ियां उतरना पड़ती है। मान्यता है कि यहां 600 सीढ़ियां चढ़ने-उतरने से एक मनोकामना परी हो जाती है।

*पवित्रता को बचाने खरीदा था पहाड़*-

अचलपुर का पहले नाम एलिच‍पूर था। यहां स्थित मुक्त‍ागिरी सिद्धक्षेत्र को दानवीर नत्थुसा पासुसा,स्व. रायसाहेब रूखबसंगई और स्व. गेंदालाल हीरालाल बड़जात्या ने मिलकर खरीदा था। अंग्रेजों के कार्यकाल में खापर्डे के मालगुजारी में 1928 में इसे खरीदा गया था। बताया जाता है कि उस दौरान शिकार के लिए पहाड़ पर जूते-चप्पल पहन कर जाते थे और जानवरों का शिकार करते थे। इसी वजह से इस सिद्ध क्षेत्र की पवित्रता को बनाए रखने के लिए उन्होंने यह पहाड़ ही खरीद लिया था।

Atishaya:
Though it is Siddha Kshetra, it is also related with many miracles. Many Sensitive devotees do visit the principal deity Bhagwan Parshvanath of 26th temple to get rid from worldly diseases and other types of illness. One foreigner himself felt one such miracle. The proof of this event with foreigner is present in the Government Gazetteer of Baitool. Moreover the shower of Saffron on hill on the Ashtami, Chaturdashi & Full moon night (Poornima) provides strong evidence for the happening of miracles at this place.
Many dangerous animals like Lion, Tiger, Leopard, Snakes & Reptiles are seen visiting at the feet of Bhagwan and it seems that they visit here to get rid of their violent tendencies. These dangerous animals have never proved violent and not even caused harm to any visitor.

Recent Miracle: - (The miracle of getting rid from incurable diseases.) The living evidence of this miracle is Mr. Arun Kumar Jain who resides in Delhi at B– 15/2 Krishna Nagar, Delhi - 51. His contact No. is 011-22436343, 09312305568, 09312275234, 09810101516.
In the year 1980 due to the effect of Cauda Equina Compression disease, Mr. Arun Kumar Jain’s one leg became weak & also its length get reduced from another leg. Thus due to difference in length of two legs he was not able to walk normally and he started using crutch. Due to tension he also became heart patient. Till 1994 he used crutches and doctors of Escorts Hospital, Delhi advised him for the operation of heart. In the month of August of year 1994 he saw a dream continuously for many days. He saw in dream Muktagiri in written and saw that he was walking without crutches on the hills of Muktagiri Teerth Kshetra. Therefore after this dream he decided that he should visit the Muktagiri Kshetra. One day he, his wife & his brother in law reached Muktagiri. At Muktagiri after walking 100 Yards he started feeling strength in his legs and rest of climbing of stairs he did without the help of crutches. On the 26th temple he received the shower of saffron on his head. Probably this shower must be the blessings of Bhagwan. At the time descending he lost all the strength and again felt the need of crutches.
In the year 1995 he again saw such dream. He decided to visit Muktagiri again. This time he visited Muktagiri along with other 60 devotees. The heart operation up to this time was postponed. This time when he reached to Dharmshala of Muktagiri he felt the strength in his leg and there was no need for him to walk with crutches because now he was able to walk normally. At Muktagiri he sang three prayers devotionally and also danced while singing. This time also there was shower of saffron and when he looked above he saw a chariot of Dev, which was shining like diamond. But as soon as he reached the Dharmshala he realized that his strength of leg was again gone and so he again took the help of crutches. Like this in the year 1996 & 1997 he visited Muktagiri and offered his prayers.
In January 1998 he again saw the dream and then he decided to visit Muktagiri again. He got reservation for Muktagiri and when his son gave tickets in his hands he felt that a kind of power has flowed in whole body and he was surprised that all the weakness of his legs vanished away.
From that time onwards he is not using the crutches and not even taking any medicines or pills. The specialist doctors of heart & bones are quite surprised to see such instant recovery. Surely this is the miracle of Atishaya Kshetra Muktagiri.

Address:
Shri Digambar Jain Siddha Kshetra Muktagiri (Mendhagiri)
Place & Post - Thapoda, Taluka - Bhensdehi,
District - Baitool (M.P.) Pin - 420260
Phone 07223-202146, 9325389573
http://www.muktagiri.org

Facilities:
Deluxe Room (attached) - 70 Rooms
Pravchan / Swadhaya Hall - Shri. Vidyasagar Bhawan is available 30 x 150 Ft.
Library - Small Library is available with various Jain literature.
Dining Hall - Pure Jain Food is available.
All types of utensils, bed, pillow, LPG cylinder & other items are available.
Generator facility is available.

Means of approach:
Road: - Buses & Taxies are available for Paratwada from Baitool Railway Station.
Buses are available for Muktagiri from Paratwada from timings 10:30 AM & 4:30 PM in the evening. On Paratwada-Baitool Roadway the Muktagiri is situated 7 km away from Kharpi Village. The vehicles are always available from Kharpi & Paratwada. Private Travels Buses operate from Amravati & Akola three times a day.
Train: - Baitool Station - 100 km
Akot - 75 km (Jaipur-Kachiguda Line)
Badnera - 70 km (Hawara-Mumbai Line)
Airport: - Nagpur - 200 km

Nearby Places:
Atishaya Kshetra - Bhatkuli Jain– 85 km
Karanja - 120 km
Hill Station Chikhaldara - 50 km

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News in Hindi

पपौरा जी में बनने वाली प्रतिभास्थली बालिका गुरुकुल में बालिका परी का प्रथम छात्रा के रूप में चयन हुआ #AcharyaVidyasagar • #Prathhasthali

Video

मुनि श्री १०८ प्रणम्य सागरजी द्वारा अर्हं योग एवं ध्यान का प्रथम पूर्ण अधिवेसन | अगर आप आत्मानुभूति तक निर्विकल्प अभ्यास करते हैं तो अपार आनंद की अनुभूति होगी|

यह क्रिया अंदर से बाहर को आनंदित करने की प्रक्रिया है | मन शांत करके शरीर को स्वस्थ करने की अतभुत क्रिया है | ॐ अर्हं |

00:00 - 08:00 - Warmup exercise
08:00 - 20:00 - शरीर के सात चक्र और ऊर्जा का प्रवाह
20:00 - 36:00 - पञ्च नमस्कार मुद्रा (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधू)
36:00 - 51:00 - अर्हं प्राणायाम एवं कायोत्सर्ग
51:00 - 57:00 - अर्हं नाद (मंत्रोचारण)
57:00 - 68:00 - आत्मानुभूति
68:00 - 75:00 - अर्हं स्तुति (मेरे मन में, तेरे मन में...)

00:00 - 08:00 - Standing warmup exercise (joints)
08:00 - 20:00 - 7 Chakras and flow of energy in life/ body
20:00 - 36:00 - Panch Namaskar Mantra
36:00 - 51:00 - Arham Pranayam and Kyotsarg
51:00 - 57:00 - Arham Naad (chanting)
57:00 - 68:00 - Arham Atmanubhav
68:00 - 75:00 - Arham Stuti - (mere man main, tere man main)

अर्हम योग ध्यान शिविर.. शारीरिक ओर मानसिक स्वस्थ होने के लिय.. मुनि प्रणम्यसागर जी द्वारा.. @ Sector-3, वैशाली, NCR #share_rightnow_pls

Special 1 hour Arham Yoga Meditation Camp to let you heal mentally / physically & spiritually by Muni Pranamyasagar G / disciple Acharya Vidyasagar G.

Sources
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  1. Acharya
  2. Acharya Vidya Sagar
  3. Acharya Vidyasagar
  4. Anger
  5. Arham
  6. Arihanta
  7. Atma
  8. Bhawan
  9. Body
  10. Chakras
  11. Delhi
  12. Dharma
  13. Dharmshala
  14. Digambar
  15. Jain Dharma
  16. Jain Food
  17. Jainism
  18. Jin
  19. JinVaani
  20. Krishna
  21. Kshetra
  22. Mantra
  23. Meditation
  24. Muktagiri
  25. Mukti
  26. Muni
  27. Nagpur
  28. Namaskar Mantra
  29. Omniscient
  30. Parshvanath
  31. Pranayam
  32. Rajput
  33. Sagar
  34. Sarvadarshi
  35. Sarvajna
  36. Siddha
  37. Siddha Kshetra
  38. Soul
  39. Stuti
  40. Swadhaya
  41. Vidya
  42. Vidyasagar
  43. Vitrag
  44. Yoga
  45. आचार्य
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