23.05.2018 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Posted: 23.05.2018
Updated on: 24.05.2018

Update

जियो जीने दो, तेरी वाणी हैं.. अहिंसा तेरी निशानी हैं..
तू ही तो साचा तारनहार हैं.. भक्तो की यही पुकार हैं..

साचा तेरा दरबार है.. तेरी हो रही जय जयकार हैं...

आचार्य भगवन श्री #विद्यासागर जी महायतिराज की प्रेरणा से सागर जेल परिसर में कैदियों के प्रशिक्षण एवम स्वावलंबन के लिये हथकरघा केंद्र संचालित हो रहा है, जिसमे प्रशिक्षण प्राप्त करने जबलपुर सहित 5 जेलों से 5-5 कैदी सागर जेल पहुँच चुके है। इनके प्रशिक्षण के बाद जबलपुर एवम अन्य जेलों में केंद्र खोले जायेगे।

Jain statue, Subai, Nandapur, Koraput, Odisha..

Every single soul has potential to be free from karmic bondage, If we adore and follow Tirthankara Mahavira's Gem-trio in daily life. #TirthankaraMahavira

Update

Video

माता पिता अपने बच्चो को संस्कार दे,उनके सामने पैसो और राग द्वेष की बाते न करे: आचार्य श्री #AcharyaVidyasagar

Parents need to impart good teachings to their kids,they do not need to talk about money and other things that are apart from liberation: acharya vidyasagar ji.

Jain Swetamber Mandir @ Dera Ghazi Khan, Pakistan.. only this Mandir in real condition in this area. No Murti was remain during 1947 people take away to India.. #Jainism_Pakistan #AncientJainism

Photographs with info shared by Mr. Shahid Shabbir from Pakistan Media.

News in Hindi

पपौरा जी में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज अपने संघ के साथ विराजमान हैं बीते 1 माह से आचार्य विद्यासागर जी महाराज कठोर साधना में लीन है 24 घंटे में एक बार ही विधि मिलने पर आहार लेते हैं, अगर विधि नहीं मिली तो फिर आहार नहीं लेते हैं यह जैन मुनि की चाह है तपती गर्मी में लगातार 1 महीने से पपौरा जी में धर्म का माहौल बना हुआ है 1 महीने से लगातार आचार्यश्री अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों को धर्म का अर्थ समझा रहे हैं ।

आचार्य श्री ने कहा कि 2 मित्र बहुत दिन बाद मिलते हैं वे दोनों मित्र कुशल कुशलता उनमें प्राय बनी रहती थी दोनों ने मिलने के बाद ठान लिया कि जो बचपन के दिनों में जो तत्व चर्चा होती है उस पर बात करेंगे एक मित्र ने कहा मैंने राजा के बारे मे आंखों के द्वारा देखा दूसरे मित्र ने पूछा क्या देखा भाई देखना तो पड़ेगा भाई आप बतला दो भाई मैंने वह दृश्य देखा एक राजा को पहले घोड़ी पर बैठा दिया जाता है फिर राजा को घोड़े से हाथी पर बैठा दिया हाथी पर बैठकर राजा अपने नगर में भ्रमण कर रहा था राजा अपने नगर में भ्रमण कर रहा था ऊपर नीचे का दृश्य देख रहा था हाथी से उतारकर राजा को पालकी में बैठा दिया पाली की सुंदर थी जो राजा पालकी पर आराम से बैठा हुआ था ऊपर की ओर ऊपर का दृश्य देख रहे थे। अब राजा की यात्रा का समय पूरा हुआ राजा को पालकी से नीचे उतारा गया नीचे उतरते ही राजा के सेवक हाथ पैर दबाने लगे लग जाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि दूसरा मित्र कहता है वह कहता है राजन हाथी पर बैठे घोड़े पर बैठी पालकी पर बैठे और राजन को नीचे उतारा तो सेवक पैर दबाने लग जाते हैं । वह कहता है राजन पैदल तो एक कदम भी नहीं चले फिर थके कैसे? आचार्य श्री जी कहते हैं यह व्यक्ति का स्वयं का पुण्य होता है जो व्यक्ति को इस प्रकार वैभव की प्राप्ति होती है यह उसके कर्मों का प्रतिफल है हम अध्यात्म की बात करते हैं कर्म आत्मा का परीगमन सामने आता है ।
अतिशय क्षेत्र पपौरा जी में आचार्य विद्यासागर जी महाराज अपने संघ के साथ 24 घंटे में एक बार ही विधि मिलने पर आहार करते हैं

हमें परिश्रम करना चाहिए तभी हम दुख से बच सकते हैं
आचार्य श्री जी ने कहा हर पदार्थ की क्रिया अखंड है आचार्य श्री जी ने कहा कोई पूछता है सात तत्व हैं जब तक हम ब्रह्म मुक्त नहीं रहेंगे तब तक हमें मुक्ति नहीं मिलेगी आचार्य श्री जी ने कहा हम भगवान की दर्शन करती है तो हमेशा हमें 7 तत्व दिखना चाहिए नहीं तो वह दर्शन पूर्ण नहीं माना जाता है आचार्य श्री ने कहा कि बरसों बीत जाते हैं आचार्य श्री ने कहा कोई राजा होता है तो कोई रकं होता है हमें परिश्रम करना चाहिए तभी हम दुख से बच सकते हैं आचार्य श्री जी ने कहा प्राथमिक दशा में कुछ कर्म तकलीफ देते हैं तो उसको दवाई के द्वारा इंजेक्शन के द्वारा ठीक किया जा सकता है रोगों का बाहर आना निश्चित हो जाता है आचार्य श्री जी ने कहा बहुत दिन हो गई है मोक्ष मार्ग पर चलते चलते अज्ञान की दशा में ज्ञानी व्यक्ति भी अपने पथ से भटक जाता है।

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