31.05.2018 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Published: 31.05.2018
Updated: 05.06.2018


घर में C.B.I. की रेड के बावजूद सत्येंद्र जैन ने किये जैन मंदिर के दर्शन • #Delhi_HealthMinister

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री श्री सत्येंद्र जैन के घर बुधवार प्रात: लगभग 08.00 बजे सीबीआई रेड पड़ी। लगभग 11.00 बजे अपनी गाड़ी से श्री सत्येंद्र जैन घर से बाहर निकलते देख लोगों को भ्रम हुआ कि श्री जैन को सीबीआई गिरफ्तार कर ले जा रही है। इस दौरान भ्रम की स्थिति बनी रही और लोगों सहित रिपोर्टर जानकारी करने में लग गये कि क्या मामला है। किंतु कुछ ही देर बाद उसी गाड़ी में बैठकर श्री जैन वापस घर आये तो पता चला कि श्री जैन मंदिर दर्शन हेतु गये थे। इसके बाद भ्रम की स्थिति दूर हुई। दरअसल श्री सत्येंद्र जैन सिविल लाइन्स के अपने सरकारी आवास के कुछ ही दूर श्री दिगम्बर जैन मंदिर नियमित प्रतिदिन दर्शन करने जाते हैं किंतु बुधवार को सीबीआई के सुबह आ जाने पर श्री जैन ने मंदिर जाने को कहा तो सीबीआई अपने साथ मंदिर दर्शन हेतु ले गई। सीबीआई रेड के दौरान सामान्यतया जिसके घर रेड हो रही होती है, वह घर से बाहर नहीं जा सकता है या नजरबंद हो जाता है। ऐसे में श्री सत्येंद्र जैन के नियमित मंदिर दर्शनों के नियम की महत्ता को सीबीआई ने समझा और उन्हें ले जाकर दर्शन कराये।

worthy read for avid readers.. #Languages 🙂

whats the importance of vernacular like #Hindi, #Prakrit_languages.. they connect you with Bharatiya literature, culture when we can't deny the existence of globally connecting language #English. -Muni PranamyaSagar Ji explaining..

Our Nation as a whole is a nation of different regional and local languages with the national language Hindi. In 1835, first Macaulay had introduced English in Indian education system to make all nations English internally. It was a deceiving trick to change nationality and to make mental slaves. We are seeing that Macauly is now eighty percent successful in his long-range mission. Now in this the age of globalization, everyone is interconnected with the help of internet and it is impossible to discard the learnings and teachings of English completely.

All around there are two types of people with two types of thoughts about English. The first thinks that English is the language of the whole nation. It is now much more necessary to teach and learn our children in English medium. Many management gurus, high profile celebrities and masters of education system always promote the English medium based education. They know that their kids can increase the percentage of earning at every step of their life. Their kids can get high standard jobs in reputed companies. They admit them in private colleges paying large scale fees. The reality is that despite all this, they never give them a view of global success and personal peace, cultural values, a wide thinking in literature, science and sociality. As a result of this, the students and entrants are becoming elites and entities who consider others inferior.

We have seen an example of this when a central minister says that we can not travel by cattle class people (general department in a train). Also, they have no knowledge of local language mixed with familiar meanings of words like Jwar, Bazara, Kadhi, Lachaka, Bari etc. eatable things like Daal, Bhaat, Bakhara etc. have natural names and they do not know several names of common things like bottle gourd which is also called Loki, Ghiya, Aaal. etc. in different regions. So lack of knowledge of our ethnical etymology is a major drawback of English education.

Second, the section of second class people who know the importance of our Hindi language as a language of the nation. They are worried about English as it is competing and destroying vernacular. After that, they also admit their children in English medium schools to make them deserved.

Nowadays, the education does not depend on the personal interest seeing an advantage disadvantage of culture, language, and traditional factors. But it also depends on the salary and status of a person. It depends also on the atmosphere surrounding you. We can never see a person who has such loyalty to our nation that he is living a prosperous and lucky life, and leads his kids to study in Hindi medium. We need to have both Hindi and English respectively like mother and wife. Our mind is like a lighted and Airfree home. In this, Hindi is necessary just as the main gate. At the same time, English or other languages work like windows. Without doors, there is no image of a good home. Also, windows in houses are important too and provide convenience.

A far from the opposition, we should accept easily the importance of both languages. Never think that English is the only ultra most uttered world class famous language. In the language survey, it was found the second grade in the world. The first is Chinese and the third one is Hindi. So be proud to be an Indian and of this Indian language. The most Ancient Indian language is Prakrit contemporary to Sanskrit. The words of so many regional languages are also heard up to this time. So, we also have a responsibility to save the Prakrit, the Grand Ma of all the languages in the world. Basic Jain scriptures, Buddha scriptures, and many historical plays are written in Prakrit language.

“Prakrit is our Grand Ma, Sanskrit is our Grand Pa, Hindi is our Mother, Apbhransha is our Father, And English is our Wife.”

.....Article written by Digambara Muni Pranamyasagar Ji / disciple Acharya Vidyasagar Ji.

छोड़ो अभिमान पाओ सम्मान -प्रमाण सागर महाराज जी के प्रवचनों से.. z

एक पिता अपने बेटे के साथ माउंट आबू गया। दोनों सनसेट पॉइन्ट पर थे। सूरज डूबने ही वाला था। पिता बड़ा अभिमानी था। उसने अपने चार साल के बेटे से कहा- “बेटा! मेरी ताकत देखना चाहता है?” बेटा बोला- “दिखाइये न पापा।” तो देख सामने सूरज है न, अभी मैं उससे कहूँगा डूब जाओ तो सूरज डूब जाएगा। बेटे को बड़ा अच्छा लगा कि मेरे पिता जी इतने शक्ति सम्पन्न हैं कि सूरज को भी डुबा सकते हैं। वह बोला-”पापा करके बताओ।” सूरज डूबने वाला था, पिता ने दूर से कहा “GO DOWN”' और इतना कहते ही सूरज डूब गया। पिता ने बड़े अभिमान से अकड़ते हुए कहा-” बेटा देख ली मेरी ताकत!” बेटे ने कहा “ हाँ पापा! बहुत अच्छा, Please do once again! Please try once again! अब पिता क्या करे? सब धरा रह गया। इसलिए कभी भी अभिमान मत करो और सम्मान में कभी चूक मत करो!

मैं तो बहुत छोटा हूँ और दूसरे लोग भी हैं, मुझे सबको देखना है और सबके साथ चलना है। ये परिणति अपने अंदर होनी चाहिए। यदि आप दूसरों को श्रेय बाँटोगे तो लोग आपके कायल बनेंगे और प्रशंसक बनेंगे और यदि सारा श्रेय खुद लूटने की कोशिश करोगे तो लोग कहेंगे बड़ा विचित्र आदमी है, करते हम हैं और माला खुद पहनता हैं।

*सम्मान करोगे,सम्मानित होगे। सम्मान चाहोगे तो अपमानित होना पड़ेगा*। यह सूत्र अपने जीवन में ले लो- *श्रेय बाँटोगे, तो तुम्हें भी श्रेय मिलेगा* और सारा श्रेय खुद लेने का प्रयास करोगे तो सब चला जाएगा।’ हमेशा यही भाव रखो कि अगर कोई काम अच्छे से हो रहा है तो उसकी सफलता मेरी वजह से नही अपितु उन बाकी सारे लोगो के कारण है, जो उस कार्य से जुड़े हैं! जब हम दूसरों का सम्मान करेंगे तब अपने आप ही हमे भी सम्मान प्राप्त होगा!

urgent help need - A Delhi Boy.. these days in 'Hiriadka, Udupi, Karnataka' उसका नियम हैं रोज़ मंदिर जाने का अगर कोई जिनेंद्र देव मंदिर hiriadka, #Udupi, #Karnataka में हैं तो कृपया बताए ओर exact कहा हैं ये भी बताए.. या कोई फ़ोन नम्बर हो! (Priyanshu Jain)

दिग जैन अतिशय क्षेत्र स्तवनिधि, तहसील - चिक्कोड़ी, जिला - बेलगाँव (कर्नाटक)

पाय शेट्टी और जायशेट्टी श्रावको के उपचार से बीजापुर बादशाह की बीमार बेगम की बीमारी ठीक हो गयी जिससे खुश होकर बादशाह ने जैन मंदिर बनाने की अनुमति दी ।दोनों श्रावको को सपने मे वाल्मिक से ध्वनी सुनाई दी ।खोदने पर मूर्ति खंडित हालत में प्राप्त हुई ।पुनः स्वप्न पाकर मूर्ति निकली तो अखंडित मूर्ति प्राप्त हुई ।वही मूर्ति श्री नवखंड पार्श्वनाथ दर्शन के लिए उपलब्ध है ।यहाँ क्षेत्रपाल ब्रम्ह देव भी श्रद्धा के श्रोत है ।

News in Hindi

गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय! बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बनाए!

अभी कल की ही बात है रविवार का दिन था सो सुबह से ही सारे भारत की लोग पपौरा जी पर पहुंचकर आचार्य भगवंत के दर्शनों को लालायित से खड़े थे जिनमें से कुछ लोग तो मुझे विदेश से आने वाले भी मिले जिनका कहना था कि मैंने तो सुना बस है कि साधु ऐसे होते हैं कभी देखा नहीं है आज पहली बार उनके साक्षात दर्शन होंगे और बहुत से ऐसे लोगों को भी देखा जो जाति से जैन तो नहीं थे किंतु गुरुदेव के प्रति असीम श्रद्धा और समर्पण ने उन्हें इतनी भीषण गर्मी में भी गुरुदेव के दर्शन को पँक्तिबृद्ध किया हुआ था

समान्यतः आचार्य भगवान के दर्शन हमें दिन में कई बार हो जाते है लेकिन पिछले दो तीन दिनों से कुछ शारीरिक अस्वस्थता के कारण दिन में निश्चित बार ही उनके दर्शन मिल पा रहे हैं ऐसे में हमारा स्वयं का विवेक होना चाहिए कि हम व्यवस्था में सहयोग करें हमारा नेतिक कर्तव्य होना चाहिए जिन गुरु के प्रति हमारी श्रद्धा और समर्पण है उनके स्वास्थ्य की चिंता भी हम ही करें,हम भले उनके दर्शन मंच पर सामूहिक रुप से करें पुण्य तो हमे उनके चरण छूने का ही प्राप्त होगा और कभी इस बात पर भी कुपित नहीं होना चाहिए कि अमुक व्यक्ति ने दान दिया है सो उसे गुरुवर के चरणों को छूने का सौभाग्य मिल रहा है क्योंकि शास्त्रों में भी लिखा है दान देने वाला श्रेस्ठ है फिर श्रेष्ठ का सर्वश्रेष्ठ से मिलन कोई नया तो नहीं, आज तीसरा दिन था जब हम सभी को गुरुवर की पूजन करने का सौभाग्य नही मिला है और ना ही उनके मुख से शुभ संदेश ही सुन पा रहे है भगवान से विनती है गुरुदेव कल हमे अपने आशीष अवश्य दे सके उन्हें जल्दी से जल्दी स्वस्थ करे

विश्ववंदनीय आचार्य गुरुवर सदा जयवंत हो

*श्रीश ललितपुर*

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