14.05.2011 ►Acharya Mahashraman Is Ambassador Of Peace ◄Muni Sumati Kumar

Posted: 14.05.2011
Updated on: 21.07.2015

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Chhapar

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Acharya Mahashraman Is Ambassador Of Peace ◄ Muni Sumati Kumar

 

 

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Churu

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Acharya Mahahsraman Is Source Of Light ◄ Sadhvi Ramkumari

 

 

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Bidasar

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Birth Of Great Soul Is Auspicious For Whole World

 

 

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Rajaldesar

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Mahotsav Celebrated In Presence Of Sadhvi Vinay Shree

News in Hindi:

देश भर में महाश्रमण के जन्म एवं प्रथम पदाभिषेक की धूम

 

महाश्रमण शांति के अग्रदूत: मुनि सुमति

 

आचार्य महाश्रमण का प्रथम पदाभिषेक दिवस मनाया 

 

छापर. भिक्षु साधना केंद्र में आचार्य महाश्रमण के प्रथम पदाभिषेक समारोह को संबोधित करते मुनि सुमति कुमार।

 

छापर 14 मई 2011 (जैन तेरापंथ समाचार ब्योरो)

 

सेवा केंद्र व्यवस्थापक मुनि सुमति कुमार ने आचार्य महाश्रमण को शांति का अग्रदूत बताते हुए कहा कि महाश्रमण ने तेरापंथ धर्मसंघ के दशम आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा शुरू की गई अहिंसा यात्रा को अनवरत जारी रख कर सभी धर्म एंव संप्रदायों में प्रेम, सौहार्द व शांति की अलख जगाई। मुनि सुमति कुमार शुक्रवार को कस्बे के भिक्षु साधना केंद्र में शासन गौरव मुनि ताराचंद स्वामी के सानिध्य में आयोजित आचार्य महाश्रमण के प्रथम पदाभिषेक समारोह में श्रावक समाज को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य महाश्रमण को आचार्य तुलसी की देन बताते हुए कहा कि आचार्य तुलसी ने अपने जीवन काल में ही महाश्रमण के लिए आचार्य बनने के रास्ते खोल दिए थे। युवा चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप सुराणा ने कहा कि आचार्य महाश्रमण अहिंसा यात्रा के जरिये समाज में नैतिक मूल्यों का विकास कर समूचे विश्व में तेरापंथ धर्मसंघ का परचम लहरा रहे है जो नैतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवद्र्धन में मील का पत्थर साबित हो रहा है। मुनि देवार्य कुमार ने आचार्य महाश्रमण को तेरापंथ धर्मसंघ के दो महान आचार्यों द्वारा तराशा हुआ हीरा बताया। कार्यक्रम को मुनि देवार्य कुमार, मुनि देवराज, धर्मप्रकाश बैद, आलोक नाहटा, सूरजमल नाहटा, मंजू दुधोडिय़ा एवं कुसुम दुधोडिय़ा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम महासभा के मौलाना मुमताज अली कादरी, भाजपा अध्यक्ष महावीर खटीक, कन्या मंडल संरक्षिका मंजू दुधोडिय़ा, उप संयोजिका प्रिया नाहटा, हेमलता नाहर एवं यशा दुधोडिय़ा को तेरापंथ सभा के मंत्री बिमल दुधोडिय़ा, महिला मंडल संरक्षिका कंचन देवी नाहटा एवं प्रदीप सुराणा ने साहित्य भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन कन्या मंडल की यशा दुधोडिय़ा ने किया।

 

 

 


‘ज्योति पुंज है आचार्य महाश्रमण’- साध्वी रामकुमारी

 अमृत महोत्सव के रूप में मनाया गया आचार्य महाश्रमण का ५० वां जन्म दिवस

 चूरू 14 मई 2011 (जैन तेरापंथ समाचार ब्योरो)

साध्वी रामकुमारी ने कहा कि आचार्य श्री महाश्रमण एक ज्योति पुंज हैं, जो अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से सर्वसमाज को आलोकित कर सत्पथ पर चलने की प्रेरणा दे रहे हैं।

वे शुक्रवार को कमल कुंज में आचार्य महाश्रमण के अमृत महोत्सव व पट्टोत्सव के अवसर पर हुए आयोजन में उपस्थितजन को संबोधित कर रही थी। आर्षवाणी से शुरू हुए कार्यक्रम में साध्वीवृंद ने साध्वीप्रमुखा द्वारा रचित अमृत महोत्सव गीतिका का संगान किया। आचार्य महाश्रमण के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए साध्वी रामकुमारी ने कहा कि वे बुद्धि, चरित्र, पराक्रम व संवेदना संपन्न हैं। साध्वी मयंकयशा ने कविता के माध्यम से आराध्य की अभिवंदना की। साध्वी कीतिप्रभा, रचना कोठारी व ऋचा ने गीतिका की प्रस्तुति दी। संचालन शशि कोठारी ने किया।


बीदासर 14 मई 2011 (जैन तेरापंथ समाचार ब्योरो)

तेरापंथ मघवा समवसरण में शुक्रवार को आचार्य महाश्रमण के अमृत महोत्सव के प्रथम चरण का कार्यक्रम समाधि केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी सुमनश्री के सानिध्य में मनाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल की बहिनों के मंगलगीत से हुआ। इस अवसर पर साध्वी सुमनश्री ने कहा कि महापुरुषों के जन्म से पूरा संसाल पुलक उठता है। युग की पुकार सुन कोई महापुरुष इस धरती पर आते है। साध्वी व्रसुमति ने गीत की प्रस्तुति दी। साध्वी अपूर्वयशा ने मुक्तक, साध्वी मननप्रभा ने मां नेमा से चमक्यो...गीत की प्रस्तुति दी। इससे पूर्व साध्वी सुरेखा ने मंगल संदेश का वाचन किया। इस अवसर पर साध्वी मुधरलता, ऋजुप्रज्ञा, सुदर्शना, मनीष प्रभा ने महाश्रमणी साध्वी प्रमुखा द्वारा रचित गीत की प्रस्तुति दी। सारिका दुगड़ ने विचार व्यक्त किए। 


मंगलमय होता है महापुरुषों का जन्म: विनयश्री 

राजलदेसर 14 मई 2011 (जैन तेरापंथ समाचार ब्योरो)

 वृद्ध साध्वी सेवा केंद्र में शुक्रवार को तेरापंथ धर्मसंघ के ११ वें अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण का ५० वां जन्म दिवस अमृत महोत्सव के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी विनयश्री ने आराध्य का अभिनंदन करते हुए उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं से कहा कि महापुरुषों का जन्म पूरी कायनात के लिए मंगलमय होता है। क्योंकि महापुरुष जीवन में एक नई ज्योति लेकर आते हैं और अन्य लोगों को भी ज्योतिपुंज बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दिन सरदारशहर की पुण्यधरा पर मां नेमा की कुक्षि से एक मानव जन्म हुआ था। आचार्य तुलसी व आचार्य महाप्रज्ञ की शीतल छत्र-छांव में वह मानव महामानव, महातपस्वी और महामनस्वी आचार्य महाश्रमण बना। 

 आचार्य महाश्रमण अहिंसा यात्रा की मशाल को लेकर जनमानस में दया व अनुकंपा की चेतना जागृत कर रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रज्ञागीत से हुआ। साध्वी प्रभाश्री, जगतप्रभा, मननयशा, मर्यादाप्रभा, संवेगश्री व आत्मयशा आदि साध्वियों ने गीतिका, मुक्त्कों व विचारों के जरिए अभ्यर्थना की।

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