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शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य से आज के नयनाभिराम दृश्य।
04.12.2015
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★ सुविचार ★
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News in Hindi
🌍 आज की प्रेरणा 🌍प्रवचनकार - आचार्य श्री महाश्रमण
विषय - हेड, हैण्ड & हार्ट की त्रिवेणी
प्रस्तुति - अमृतवाणी
संप्रसारण - संस्कार चैनल के माध्यम से --आर्हत वाड्मय के अनुसार जो - विनीत होता है वह संपदा को व जो अविनीत होता है वह विपत्ति को प्राप्त करता है | इन दो चीजों को जान लेने वाला बुद्धिमान होता है | विनय से विद्या शोभित होती है और विद्या के साथ अहंकार का न होना तो ओर भी अच्छी बात है| विद्या से विनय, विनय से पात्रता, पात्रता से धन व धन से धर्म हो सकता है | यदि उसके साथ अहंकार न आये और उसका सम्यक उपयोग हो | वैसे तो धन से धर्म नहीं होता पर यह किसी की सेवा में काम आ सकता है व कहीं कहीं धर्म करने में सहयोगी भी हो सकता है| विद्यार्थियों में अहंकार विलय के साथ पुरुषार्थ की भी अपेक्षा होती है| रत्न हमारी खोज नहीं करता बल्कि हमें रत्न की खोज करनी पड़ती है | आलस्य मनुष्यों का महान क्षत्रु है | श्रम के समान कोई बंधू नहीं होता | यदि हेड, हेंड और हार्ट तीनों अच्छे हों तो विद्यार्थियों का जीवन अच्छा बन सकता है | अच्छे संस्कारों के साथ परिश्रम भी हो तथा ज्ञान का सही विकास भी | विद्यार्थी शराब आदि हर प्रकार के नशे से दूर रहें | लक्ष्य ऊंचा होना चाहिए | यदि लक्ष्य ऊंचा हो ती विद्यार्थी देश के अच्छे नागरिक बन सकते है | देश के बच्चे ही तो आगे जाकर महान व बड़े आदमी बनते है|
दिनांक - ४, दिसम्बर २०१५