03.02.2017 ►Acharya Shiv Muni ►News

Posted: 03.02.2017
Updated on: 04.02.2017

Update

Akshay Trithya - 29 April 2017 @ Badi Sadri, Rajasthan

News in Hindi

श्री रविंद्र जी जैन बने श्री शौर्य मुनि जी म.सा.

जहां संकल्प है वहां असंभव कुछ भी नहीः आचार्य सम्राट श्री शिवमुनि

श्री स्थानकवासी जैन श्रावक संघ उदयपुर के तत्वावधान में आचार्य सम्राट श्री शिवमुनिजी महाराज ससंघ के सानिध्य में भव्य जैन भगवती दीक्षा महोत्सव सम्पन्न

उदयपुर, 1 फरवरी। श्री स्थानकवासी जैन श्रावक संघ उदयपुर के तत्वावधान में आचार्यश्री शिवमुनिजी महाराज ससंघ के सानिध्य में बुधवार को बसन्त पंचमी के अवसर पर आज चित्रकूट नगर स्थित रसिकलाल एम. धारीवाल स्कूल प्रांगण में भव्य जैन भगवती दीक्षा महोत्सव हुआ। दीक्षार्थी साधक रविन्द्र जैन आचार्य सम्राट श्री शिवमुनिजी महाराज से दीक्षित होकर रविन्द्र जैन से शौर्य मुनि बने।

दीक्षा समारोह के प्रारम्भ में दीक्षार्थी रविन्द्र जैन ने आचार्यश्री सहित सभी मुनिवृन्दों का आशीर्वाद लेकर उपस्थित जनों को अपना परिचय दिया। उन्होंने कहा कि दीक्षा परमात्मा को पाने की पहली सीढ़ी है और अरिहन्त के चरणों में स्थान पाने का मार्ग है। दीक्षा न ली जाती है और न ही दी जाती है। दीक्षा भावना तो एक वैराग्य है तो अपने आप स्वयं में उत्पन्न होता है। उन्हें इसकी प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली जो जीवन में हमेशा धर्मध्यान और अरिहन्त की आराधना करते थे। बचपन से उन्हें देखता आया हूं और आखिरकार उनके जीवन में भी यह भाव जागा और आज दीक्षा ले रहा हूं। सभी से क्षमा याचना करते हुए उन्होंने उपस्थित सभी समाजजनों को प्रभावना वितरित की। इस दौरान दीक्षार्थी की जय-जयकार से दीक्षा स्थल गूंज उठा।

इसके बाद साधुवृन्द दीक्षार्थी को अपने साथ ले गये एवं सांसारिक परिवेश का त्याग करवा कर साधुवेश धारण करवाया एवं पुनः जयकारों के साथ दीक्षार्थी को आचार्यश्री के सानिध्य में लाया गया।

आचार्यश्री ने दीक्षार्थी को विभिन्न दीक्षा विधियां सम्पन्न करवाई। णमोकार मं़त्र का जाप करवाया, सामयिक सूत्र ग्रहण करवा कर मन, वचन और काया का शुद्धिकरण करवाने की विभिन्न विधियां सम्पादित करवाई। दीक्षार्थी को संयम का संकल्प करवाने के बाद साधु जीवन के सभी आवष्यक सामग्री प्रदान की। समारोह में जैसे ही आचार्यश्री ने दीक्षार्थी का नामकरण कर रविन्द्र जैन को शौर्यमुनि उद्घोषित किया तो चारों और हर्ष-हर्ष और जयकारों से सभागार गुंजायमान हो गया। इसके साथ ही आचार्यश्री ने शौर्यमुनि के कैशलोच की विधि भी सम्पादित की।

दीक्षा विधि सम्पादित होने और संयम साधना का मार्ग अंगीकार करने के बाद शौर्यमुनि को मंच पर मुनिवृन्दों के साथ ही आसन ग्रहण करवाया।

इस अवसर पर आचार्य सम्राट शिवमुनि ने कहा कि शौर्यमुनि के संकल्प, साधना और दृढ़ निश्चय के आगे आज हर कोई नतमस्तक है। दीक्षा लेना इतना आसान काम नहीं है। इन्होंने प्रेम से परिवार, रिश्ते-नातेदारों का सभी का दिल जीत कर आज यह मुकाम हासिल किया। जहां संकल्प है वहां असंीाव नाम की कोई चीज नहीं होती है। साधना का नाम ही जीवन है। ज्ञान, शांति, परमात्मा, अनन्त सभी भीतर हैं, केवल ज्ञान बाहर या शास्त्रों में नहीं मिलता है वह ही अपने भीतर से ही मिलता है। दीक्षा ही ऐसा मार्ग है तो मनुष्य को भीतर तक की यात्रा करवाती है।

इसके बाद चादर महोत्सव हुआ जिसमें आचार्यश्री सहित मुनि वृन्दों को चादर समर्पित की गई। अन्त में आचार्यश्री ने सभी को मंगलपाठ सुनाया।

इससे पूर्व लोकमान्य सन्त रूप मुनि ने दीक्षार्थी को संयम के मार्ग पर चलने का आशीर्वाद देते हुए कहा कि आज से इनका नया जन्म हुआ है इनके जीवन की सारी प्रक्रियाएं ही बदल गई है। दीक्षा के दो अक्षर का महत्व बताते हुए मुूनि ने कहा कि दी यानि दीनपना और क्ष यानि क्षय होना यानि जिससे दीनपने का क्षय हो वह दीक्षा है। सांसारिक जीवन में सभी धर्म और संयम के नाम पर दीन-हीन ही होते हैं। जब धर्म का मार्ग जीवन में आता है तो दीनपने का क्षय हो जाता है। आचार्य कपिलजी, सुभम मुनि, शिरीष मुनि आदि ने भी नव दीक्षित शौर्यमुनि जी को आशीर्वाद प्रदान किया।

साधक श्री रविन्द्र जैन महाअभिनिष्क्रमण करते हुये।

श्वेताम्बर मूर्तिपूजक ट्रस्ट के श्री राजलोढ़ा एवं श्री गजेन्द्र जी भंसाली साधक श्री रविन्द्र जैन का अभिनंदन करते हुये

उदयपुर श्रीसंघ के अध्यक्ष श्री अम्बालाल जी नवलखा एवं श्री ओंकारलाल जी सिरोया साधक श्री रविन्द्र जैन का अभिनंदन करते हुये।

साधक श्री रविन्द्र जैन की सांसारिक धर्मपत्नि श्रीमति कृष्णा जैन का अभिनंदन करते हुये उदयपुर महिला मण्डल।

साधक श्री रविन्द्र जैन दीक्षा से पूर्व अपने भावों की अभिव्यक्ति देते हुए

साधक श्री रविन्द्र जैन दीक्षा से पूर्व वेश परिवर्तन हेतु आज्ञा लेते हुए

मुनि वेश में पांडाल में प्रवेश करते हुए साधक श्री रविन्द्र जैन

मुनि वेश में पांडाल में प्रवेश करते हुए साधक श्री रविन्द्र जैन

नवदीक्षित श्री शौर्य मुनि जी रजोहरण ग्रहण करने के बाद प्रसन्नता के क्षणों में

नवदीक्षित श्री शौर्य मुनि जी मनमोहक मुद्रा में

नवदीक्षित श्री शौर्य मुनि जी मनमोहक मुद्रा में

नवदीक्षित श्री शौर्य मुनि जी मनमोहक मुद्रा में

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