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Posted: 09.09.2017

News in Hindi:

अहिंसा यात्रा प्रेस विज्ञप्ति
जैन एकता: महाश्रमण की मंगल सन्निधि में पहुंचे विभिन्न जैन संप्रदाय के लोग
-संसार अनुप्रेक्षा द्वारा मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का आचार्यश्री ने दिया मंत्र
-आचार्यश्री की सन्निधि दिल्ली के विभिन्न जैन संप्रदायों के पहुंचे लोग
-आए लोगों ने आचार्यश्री के समक्ष दी अपनी भावाभिव्यक्ति प्राप्त किया आशीर्वाद
-आचार्यश्री के पहले के बाद पहली बार आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में चली जैन एकता की बात
-आचार्यश्री के दर्शन को पहुंचे केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल
-बढ़ती हिंसा को नियंत्रित करने के सारे गुण आचार्यश्री की अहिंसा यात्रा में: अर्जुनराम मेघवाल

09.09.2017 राजरहाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)ः जन-जन के मानस को परिवर्तित करने, सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की ज्योति जलाने को निकले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान महासूर्य, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में महाश्रमण विहार के अध्यात्म समवसरण में एक अनूठा दरबार सज गया। मानों आचार्यश्री की प्रभावी पहल ने पूरे देश के जैन समाज में एकता की एक नई आशा की किरण जगाई तो उससे ज्योतित अन्य जैन समाज के लोग भी आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में पहुंचे और आचार्यश्री के पहल को दिल से स्वीकार करते हुए आचार्यश्री के समक्ष प्रणत हुए, आशीर्वाद प्राप्त किया और अपनी भावाभिव्यक्ति दी। इस नेक पहले के गवाह बने भारत के केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल। इस दौरान उन्होंने अपने वक्तव्य में आचार्यश्री की अहिंसा यात्रा को सराहा और कहा कि आचार्यश्री द्वारा प्रणित अहिंसा यात्रा ही देश में बढ़ती हिंसा को रोकथाम का उपचार कर सकती है।

गत दिनों संवत्सरी महापर्व के अवसर पर आचार्यश्री ने जैन एकता की बात करते हुए एक संवत्सरी मानाए जाने की पहल की तो मानों आचार्यश्री की वाणी ने ऐसा जादू की समग्र जैन समाज महातपस्वी, प्रभावी प्रवचनकार आचार्यश्री की प्रेरणा से उत्प्रेरित सा हो उठा है। इसका उदाहरण शनिवार को कोलकाता महानगर के राजरहाट में स्थित महाश्रमण विहार परिसर में बने भव्य प्रवचन पंडाल में। आचार्यश्री की सन्निधि में दिल्ली से साधुमार्गी, मूर्तिपूजक व दिगम्बर जैन संप्रदाय के लोगों के साथ जैनेतर लोग भी पहुंचे।

सर्वप्रथम आचार्यश्री ने अपनी मंगल वाणी से ‘ठाणं’ आगमाधारित अपने मंगल प्रवचन में लोगों को संसार अनुप्रेक्षा करने की पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को संसार अनुप्रेक्षा करने का प्रयास करना चाहिए। साधक यह चिन्तन करे कि हमारी आत्मा बार-बार जन्म लेती है और मृत्यु को प्राप्त कर वापस इस संसार में भ्रमण करती है। आदमी को यह सोचना चाहिए कि बार-बार जन्म लेने और मृत्यु को प्राप्त होने से छुटकारा मिले और आत्मा को सिद्धत्व की प्राप्ति हो सके। इसके लिए संसार अनुप्रेक्षा के द्वारा आदमी को संसार से मुक्त रहने का प्रयास करना चाहिए।

आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त दिल्ली से आए विभिन्न जैन धर्म के लोगों ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति देना आरम्भ किया। इस क्रम में सर्वप्रथम जीतो के महामंत्री श्री आशीष कोचर ने आचार्यश्री के पहल को सराहा और कहा कि जिस तरह आपने दिल्ली में चतुर्मास कर जैन एकता की अलख जगाई थी आज उस एकता की दिशा में एक अनूठी मशाल जलाकर जन-जन को आशान्वित कर दिया है। दिगम्बर जैन समाज की ओर से व पारस चैनल की ओर से श्री राजेश जैन ने भी आचार्यश्री के समक्ष भावाभिव्यक्ति दी। जैन महासभा के अध्यक्ष श्री प्रो. रतन जैन ने आचार्यश्री के समक्ष प्रणत होते हुए कहा कि आप जैसा तेरापंथ का सूर्य जो पूर्व दिशा की ओर से नवीन सुबह की रोशनी बिखेरी है, उससे समस्त जैन समाज जगमगाने लगा है। जैन एकता की बात भले पहले से चली हो, किन्तु अब लगता है उसको पूर्णता आपके द्वारा ही प्राप्त होगा। मूर्तिपूजक समाज के श्री ललित नाहटा ने भी आचार्यश्री के जैन समाज की संवत्सरी को एक करने की पहल को और आगे बढ़ाने की प्रार्थना करते हुए कहा कि केवल दो ही संपूर्ण जैन समाज की संवत्सरी एक हो, जैन समाज एक हो, ऐसा आशीर्वाद प्रदान कराएं। जैन समाज के श्री कन्हैयालाल पटावरी ने भी अपने अभिभाषण में आचार्यश्री के पहल के प्रति अपनी कृतज्ञता अर्पित की। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष श्री किशनलाल डागलिया, तेरापंथी सभा मुम्बई के अध्यक्ष श्री सुनील कच्छारा, श्री संजीव गणेश नायिक, ठाकुर काम्पलेक्स के ठाकुर रमेश सिंह ठाकुर ने भी अपनी प्रणति आचार्यश्री के चरणों में अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती कल्पना बैद ने तत्त्वज्ञान और तेरापंथ दर्शन प्रचेता प्रशिक्षक के कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी और आचार्यश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। तेरापंथ धर्मसंघ की महिलाओं ने अणुव्रत गीत को बंगला भाषा में प्रस्तुत किया। अणुव्रत समिति कोलकाता के अध्यक्ष श्री महेन्द्र पारख, 68वें अणुव्रत सम्मेलन के संयोजक श्री अमरचंद दूगड़ ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी।

वहीं आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में निरंतर प्रेरणा प्राप्त करने के लिए पहुंचने वाले भारत सरकार के केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने आचार्यश्री के महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद की हिंसा को रोकने के लिए जिस प्रकार महात्मा गांधी कोलकाता में उपस्थित थे। उसी प्रकार देश में बढ़ती हिंसा की जड़ को ही समाप्त करने का संकल्प लेकर आप इतनी विशाल पदयात्रा करते हुए कोलकाता में पहुंचे हुए हैं। मेरा विश्वास है कि आपकी प्रेरणा से आपकी अहिंसा यात्रा की बढ़ती हिंसा के रोकथाम की दवा बन सकती है। उन्होंने कहा कि आज जिस पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर पूरा विश्व चिंतित है उस पर्यावरण की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों का संयम का उपयोग करने की करने की प्रेरणा ही नहीं स्वयं उसका अनुपालन आचार्यश्री महाश्रमणजी कर रहे हैं और तेरापंथ के पूर्वाचार्यों ने भी किया। उन्होंने अणुव्रत के गीत को देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की बात बताई। अंत मंे अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जैन ने आचार्यश्री के समक्ष अपनी भावाभिव्यक्ति दी और अणुव्रत लेखक पुरस्कार वर्ष 2016 के लिए श्री महेन्द्र जैन के नामों की घोषणा की। इस दौरान केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल का अणुव्रत से जुड़े हुए विभिन्न पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं ने अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह और साहित्य प्रदान कर सम्मान किया।

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