15.08.2018 ►Acharya Shri VidyaSagar Ji Maharaj ke bhakt ►News

Posted: 15.08.2018
Updated on: 17.08.2018

Update

आदिविधाता प्रथम तीर्थंकर श्री #आदिनाथ भगवान जिनके पुत्र श्री भरत के नाम पर राष्ट्र का नाम #भारत पड़ा उनके भाई श्री #बाहुबली भगवान की #गोम्म्टेश्वर में स्थित विश्व विख्यात 1000 वर्ष प्राचीन प्रतिमा का राष्ट्रीय महापर्व पर अभिषेक

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Acharya Vidyasagar Ji has always told to every listeners that India means considered Backward class.. uneducated.. and enslaved people of a country, that was the name given by britishers to Bharat.. they wanted demolish anything Bharatiya people can proud, they demolished our education system.. our Backbone our culture by anyhow.. to establish their power. #share

changing name from Bharat to India was a serious mistake.. when someone occupies a nation.. they ll change a name first.. that is enslaving, destroy image.. I would like to request our Prime minister Mr. Modi to rename our country.. Bharat.. Bharat has a power! words By Sadguru..

Businessman Mr. Pawan Kumar Ahluwalia (MD of JKS Cement) visited Acharya Vidyasagar Ji darshan.. nd took vow not to have Non-veg in 4 month of Chaturmas! 🙂🙏🏻 #AcharyaVidyasagar

विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो जी में विश्व वंदनीय, श्री आचार्य विद्यासागर जी महामुनिराज के दर्शन के लिए विश्व प्रसिद्ध उद्योगपति एवं केजेएस सीमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री पवन अहलूवालिया जी सपरिवार खजुराहो पधारें..। आचार्यश्री के आशीर्वचन एवं प्रेरणा से श्री अहलूवालिया जी ने चातुर्मास के दौरान शाकाहार व्रत का संकल्प लिया

#President_Award #Proud_Moment फूलचंद जैन प्रेमी को उनके बहुमूल्य साहित्यिक योगदान हेतु राष्ट्रपति सम्मान की घोषणा की गयी है!!

#स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2018 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय,भारत सरकार ने सन् 2018 के राष्ट्रपति पुरस्कारों की घोषणा कर दी है । इस वर्ष प्राकृतभाषा के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान हेतु वाराणसी के सुप्रसिद्ध संस्कृत-प्राकृत एवं जैनदर्शन के वरिष्ठ विद्वान, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व जैनदर्शनविभागाध्यक्ष, अखिल भारतवर्षीय दि. जैन विद्वतपरिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. फूलचंद जैन प्रेमी, वाराणसी को उनके बहुमूल्य साहित्यिक योगदान हेतु राष्ट्रपति सम्मान की घोषणा की गयी है!!

Update

#Independence स्वतंत्रता का क्या अर्थ है? आज हम स्वतंत्र होकर भी समझ नहीं पाए हैं और न जाने कब समझेंगे? आज हमको पचास वर्ष हो रहे हैं स्वतंत्रता प्राप्त किए लेकिन हम कहाँ देख रहे हैं और क्या समझ रहे हैं? पचास वर्ष के उपरान्त भी हम यह समझ नहीं पाए कि अहिंसा क्या है? यदि अहिंसा को समझ लेते तो मांस का निर्यात क्यों करते, कत्लखाने क्यों खोलते? यदि आपको अपने देश की रक्षा करना है, देश को बचाना है तो अपने अन्दर स्वाभिमान जागृत करो, अपने कर्तव्यों को समझो, अपने दायित्वों का पालन करो, अपने आपका बोध प्राप्त करो। निश्चित ही हमारे देश में एक ऐसा वातावरण तैयार होगा जो हिंसा के तूफान को रोक देगा। हिंसा को रोकने के लिए हमें किसी धन की आवश्यकता नहीं, हिंसा धन से रुकने वाली भी नहीं है क्योंकि हिंसा का स्रोत तो हमारा स्वार्थी मन ही है, झूठी प्रतिष्ठा है, सत्ता की लोलुपता है। हम अपने मन से स्वार्थ को निकाल दें, सत्ता की लम्पटता को छोड़ दें, अपने विचारों को पवित्र बना लें तो हिंसा रुक जाएगी। विचारों में पवित्रता अहिंसा से ही आ सकती है, हिंसा से नहीं क्योंकि अहिंसा पवित्र है और हिंसा अपवित्र है।

यदि भारत की पवित्र संस्कृति और सभ्यता को पवित्र रखना चाहते हो तो भारत से मांस का निर्यात बंद कर दी। मांस बेचना भारतीय संस्कृति नहीं, बस! यही स्वर्ण जयन्ती की सार्थकता है।

भरत का भारत.. आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रवचन... स्वतंत्रता को समझो #Independence

स्वतंत्रता का क्या अर्थ है? आज हम स्वतंत्र होकर भी समझ नहीं पाए हैं और न जाने कब समझेंगे? आज हमको पचास वर्ष हो रहे हैं स्वतंत्रता प्राप्त किए लेकिन हम कहाँ देख रहे हैं और क्या समझ रहे हैं? पचास वर्ष के उपरान्त भी हम यह समझ नहीं पाए कि अहिंसा क्या है? यदि अहिंसा को समझ लेते तो मांस का निर्यात क्यों करते, कत्लखाने क्यों खोलते? यदि आपको अपने देश की रक्षा करना है, देश को बचाना है तो अपने अन्दर स्वाभिमान जागृत करो, अपने कर्तव्यों को समझो, अपने दायित्वों का पालन करो, अपने आपका बोध प्राप्त करो। निश्चित ही हमारे देश में एक ऐसा वातावरण तैयार होगा जो हिंसा के तूफान को रोक देगा। हिंसा को रोकने के लिए हमें किसी धन की आवश्यकता नहीं, हिंसा धन से रुकने वाली भी नहीं है क्योंकि हिंसा का स्रोत तो हमारा स्वार्थी मन ही है, झूठी प्रतिष्ठा है, सत्ता की लोलुपता है। हम अपने मन से स्वार्थ को निकाल दें, सत्ता की लम्पटता को छोड़ दें, अपने विचारों को पवित्र बना लें तो हिंसा रुक जाएगी। विचारों में पवित्रता अहिंसा से ही आ सकती है, हिंसा से नहीं क्योंकि अहिंसा पवित्र है और हिंसा अपवित्र है।

यदि भारत की पवित्र संस्कृति और सभ्यता को पवित्र रखना चाहते हो तो भारत से मांस का निर्यात बंद कर दी। मांस बेचना भारतीय संस्कृति नहीं, बस! यही स्वर्ण जयन्ती की सार्थकता है।

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Live @ Khajuraho.. #HappyIndependence 🇮🇳

जैन धर्म दूसरों पर शासन की नहीं, आत्मानुशासन की बात करता हैं.. -आचार्य विद्यासागर जी

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दिल्ली: 13 अगस्त 2018:- पूज्य गुरुदेव मुनिश्री तरुणसागरजी के अस्वस्थता के समाचार सुन खुद को रोक नहीं पाए स्वामी रामदेव..और पहुंच गए उनके दर्शन ओर उपचार को राधेपुरी दिल्ली!

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