07.09.2017 ►Jeevan Vigyan Academy ►First Day of Prenatal Cognition Camp

Posted: 07.09.2017

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Jeevan Vigyan Academy


News in Hindi

पूर्वजन्म अनुभूति शिविर का प्रथम दिन
पूर्वजन्म अनुभूति से बढ़ता है आत्मविश्वास: मुनि किशनलाल
हांसी, 7 सितम्बर 2017

त्रैकालिक आत्मा के अस्तित्व को जब स्वीकार करते हैं । क्या पूर्वजन्म होता है? ऐसा प्रश्न क्यों उठता है? पूर्वजन्म आत्मानुभूति से व्यक्ति को आत्म विश्वास हो जाता है। आत्मा के अस्तित्व से वह नास्तिक से आस्तिक बन जाता है। बुरे कर्मों को करने से बचता है क्योंकि जैसा कर्म करूंगा उसका परिणाम उसे भोगना होगा। पीछले जन्म में किए हुए कर्मों को जब देखता है तो उनसे क्षमा याचना करता है। जिससे पुनः वैसे कर्म नहीं कर पाता। पीछले किए हुए कर्म हल्के हो जाते हैं। उक्त विचार प्रेक्षाप्राध्यापक ‘शासनश्री’ मुनिश्री किशनलालजी ने  7 सितम्बर से 10 सितम्बर तक चलने वाले चार दिवसीय शिविर के प्रथम दिन शिविर के उद्घाटन सत्र में उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

शिविर संयोजक सुभाष जैन व तेरापंथ युवक परिषद के प्रधान राहुल ने बताया कि शिविर में भाग लेने के लिए हरियाणा के अलावा पंजाब, दिल्ली, जयपुर से भी शिविरार्थियों ने अपना पंजीयन करवाया है और यह शिविर केवल पुरुषों के लिए ही आयोजित किया गया है। शिविरार्थियों के लिए श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा-हांसी द्वारा आवास, भोजन की व्यवस्था की गई है।

मुनिश्री ने आगे कहा कि पूर्वजन्म शिविर में डरने की कोई बात नहीं है यह प्रयोग समोहन द्वारा नहीं किया जाता है। प्रेक्षाध्यान, कायोत्सर्ग, अनुप्रेक्षा के प्रयोग के द्वारा व्यक्ति को पूर्वजन्मों में उतारा जाता है। उसका प्रमाण है ‘रहस्य पूर्व जन्मों का साक्षात्कार।’ जिसमें अनेकों लोगों ने अपने पूर्व भव को देखा और उसको प्रमाणित करने के लिए खोज की तो उसने पाया कि वह वास्तव में पहले भव में अमूक जगह पर इस रूप में था।

शिविर उद्घाटन सत्र के दौरान मुनि निकंुजकुमार ने शिविर की जानकारी दी व प्रेक्षा गीत का संगान किया गया।

- राहुल जैन

English by Google Translate:

First day of prenatal cognition camp
Prosperity increases with cognition, confidence: Muni Kishan Lal

When accepting the existence of the thrilled soul, accept it. What happens to ancestor? Why such a question arises? The person gets self-reliance from ancestral self-realization. With the existence of the soul, he becomes a believer from the atheist. Because of doing bad deeds, he will have to accept the result of doing bad deeds. When he sees the deeds performed in the previous life, he apologizes to them. From which you can not do any such work again. The following actions become light. The above views were expressed by the 'GyanShri' Munshri Kishan Lalji, addressing the Dharam Sabha in the inaugural session of the camp on the first day of the four-day camp that runs from September 7 to September 10.

Camp Convenor Subhash Jain and Tarapanth Yuvak Parishad chief Rahul said that besides the Haryana, the students of Punjab, Delhi and Jaipur have registered themselves to participate in the camp and this camp has been organized only for men. Accommodation, food arrangements have been made for the students of Shree Jain Svetambara Tervanti Sangha-Hansi.

Munishri further said that there is nothing to fear in the progenitor's camp; this experiment is not done by the Sammon. The person is brought in the ancestors by the use of auditory, kriyat, and anonymity. His proof is 'Mystery of previous births.' In which many people saw their former Bhavan and searched to prove him, he found that he was in fact in the same place in the earlier place.

During the inauguration of the camp, Muni Nikunjkumar gave the information about the camp and the songs of the song were composed.

- Rahul Jain

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